शिमला। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है। सरकार का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक सेवाओं में सुधार के साथ प्रदेश के लोगों के लिए रोजगार और विकास के अधिक अवसर उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री रामपुर विधानसभा क्षेत्र के नोगली में आयोजित जनसभा को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में 10 हजार से अधिक शिक्षकों की भर्ती की जा चुकी है, जबकि अगले छह महीनों में 4 हजार और शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 150 से अधिक सीबीएसई स्कूल खोले गए हैं, जिनमें करीब 2 हजार शिक्षकों की नियुक्ति हो चुकी है। इन स्कूलों से विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को घर के नजदीक बेहतर शिक्षा की सुविधा मिलेगी।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबद्ध 300 स्कूलों को स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, वर्ष 2021 में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश की रैंकिंग 21वें स्थान पर थी, जो वर्तमान सरकार के प्रयासों के बाद पांचवें स्थान तक पहुंच गई है।
स्वास्थ्य क्षेत्र का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों और एआईएमएसएस चमियाणा अस्पताल को आधुनिक तकनीक और उन्नत मशीनरी से लैस किया जा रहा है। 19 वर्ष से अधिक पुरानी मशीनों को चरणबद्ध तरीके से बदला जा रहा है। डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए सरकार ने 500 चिकित्सकों की नियुक्ति भी की है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी सरकारी कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना के दायरे में लाया गया है और कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में यह व्यवस्था जारी रहेगी। आउटसोर्स कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा के लिए नीति तैयार की जा रही है, जिसे जल्द लागू किया जाएगा। करुणामूलक आधार पर रोजगार के करीब 70 प्रतिशत पात्र मामलों का निपटारा कर नौकरी दी जा चुकी है।
मुख्यमंत्री ने पिछली भाजपा सरकार पर प्रदेश पर 76 हजार करोड़ रुपये का कर्ज और कर्मचारियों से संबंधित करीब 10 हजार करोड़ रुपये की देनदारियां छोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के कार्यकाल के अंतिम छह महीनों में चुनावी लाभ के लिए 5 हजार करोड़ रुपये से अधिक की घोषणाएं की गईं, लेकिन उनके लिए आवश्यक कर्मचारियों और बुनियादी ढांचे का पर्याप्त प्रावधान नहीं किया गया था।
उन्होंने कहा कि सरकारी धन वास्तव में प्रदेश की जनता का पैसा है और इसका इस्तेमाल जनकल्याण तथा विकास के लिए होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने ‘व्यवस्था परिवर्तन’ का अर्थ गरीबों की आवाज सुनना, उनकी समस्याओं को समझना और उसी के अनुरूप नीतियां बनाना बताया।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने को सरकार की प्रमुख प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने कहा कि बजट में इस क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया गया है। दूध के खरीद मूल्य में वृद्धि से पशुपालकों की आय बढ़ी है और 1 दिसंबर से दूध खरीद की दरों में फिर बढ़ोतरी की जाएगी।
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के हितों के अनुरूप समझौता हासिल किया गया है, जिससे बिजली उत्पादन पर 3 हजार से 5 हजार करोड़ रुपये तक के संभावित खर्च की बचत होगी। परियोजना शुरू होने के बाद हिमाचल को सालाना करीब 1,500 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वाइल्डफ्लावर हॉल मामले में राज्य को कानूनी सफलता मिली है और इससे सरकारी खजाने में 401 करोड़ रुपये आए हैं। रॉयल्टी मामले में कानूनी जीत के बाद करछम-वांगतू परियोजना से प्रदेश को सालाना करीब 150 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने इस महीने ‘अपना परिवार, सुखी परिवार’ योजना शुरू करने की घोषणा की। इसके तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता और पात्र परिवारों को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने का प्रावधान होगा। उन्होंने जनसभा में शामिल महिला मंडलों को आवश्यक सामान खरीदने के लिए धन उपलब्ध कराने की भी घोषणा की।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना के तहत 15 लाभार्थियों को आर्थिक सहायता प्रदान की। सुख आश्रय योजना के तहत तीन लाभार्थियों को मकान निर्माण के लिए तीन-तीन लाख रुपये, एक लाभार्थी को एक लाख रुपये की किस्त और एक अन्य को 16 हजार रुपये की सहायता दी गई।
कार्यक्रम में सातवें राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष नंद लाल, हिमकॉन अध्यक्ष विकेश चौहान, पूर्व विधायक किशोरी लाल, मिल्कफेड अध्यक्ष बुद्धि सिंह ठाकुर सहित कई जनप्रतिनिधि, कांग्रेस नेता और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
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