नई दिल्ली। विपक्षी INDIA गठबंधन के घटक दलों की बुधवार को राजधानी दिल्ली में महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में कई प्रमुख विपक्षी नेता शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर विपक्षी दलों के बीच समन्वय और आगे की संयुक्त रणनीति पर चर्चा करना था। करीब साढ़े तीन घंटे चली बैठक के बाद नेताओं ने संयुक्त रूप से आगे की कार्रवाई की रूपरेखा भी सामने रखी।
बैठक के दौरान मंच पर नेताओं के बैठने की व्यवस्था पहले से तय थी। इसी बीच कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के अचानक पहुंचने से मंच की व्यवस्था में बदलाव करना पड़ा। बताया गया कि उनके बैठक में आने की पहले से निर्धारित योजना नहीं थी, इसलिए मंच पर उनके नाम की नेमप्लेट भी मौजूद नहीं थी। उनके पहुंचते ही आयोजकों और वहां मौजूद नेताओं को उनके लिए स्थान तय करना पड़ा।
बैठक में मौजूद नेताओं के बीच सोनिया गांधी के बैठने की जगह को लेकर कुछ देर हलचल रही। तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शरद पवार गुट की सांसद सुप्रिया सुले ने उनके लिए स्थान तलाशने में सहयोग किया। शुरुआत में उन्हें राहुल गांधी के पास बैठने का संकेत दिया गया, लेकिन बाद में सोनिया गांधी तेजस्वी यादव के लिए निर्धारित सीट पर बैठीं।
इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के हॉल में पहुंचने पर मंच की व्यवस्था में एक और बदलाव किया गया। खरगे के पास एक अतिरिक्त सीट लगाई गई। इसके बाद ममता बनर्जी सोनिया गांधी के बगल में बैठीं। उनके पास सुप्रिया सुले और समाजवादी पार्टी के सांसद हरेंद्र मलिक भी बैठे। इस तरह सोनिया गांधी के अचानक पहुंचने के बाद मंच पर पहले से तय बैठने की व्यवस्था में बदलाव देखने को मिला।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान खरगे बीच में बैठे थे। उनके एक ओर राहुल गांधी के साथ जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, माकपा नेता एमए बेबी, भाकपा माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, तेजस्वी यादव और कपिल सिब्बल समेत अन्य नेता मौजूद थे। दूसरी ओर सोनिया गांधी, ममता बनर्जी और अन्य विपक्षी नेता बैठे दिखाई दिए।
कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के लिए भी पहली पंक्ति में स्थान निर्धारित किया गया था, लेकिन उनके बैठक में मौजूद नहीं होने के कारण वह जगह खाली रही। बैठक में सोनिया गांधी और ममता बनर्जी की साथ बैठी तस्वीरें भी सामने आईं, जिसने कार्यक्रम के दौरान लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
बैठक में विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की। बैठक के बाद गठबंधन ने संयुक्त कार्यक्रमों की घोषणा की, जिसमें 2 से 8 अक्टूबर के बीच लोकतंत्र बचाओ मार्च और अन्य विरोध कार्यक्रम शामिल हैं। छह अक्टूबर को विपक्षी सांसदों के चुनाव आयोग तक मार्च करने की भी घोषणा की गई है।
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