Himachal: पूर्व मंत्री मेजर विजय सिंह मनकोटिया का निधन हिमाचल की राजनीति में एक युग का अंत

धर्मशाला, 29 सितंबर 2026। हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ राजनेता और पूर्व मंत्री मेजर विजय सिंह मनकोटिया का 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया। कांगड़ा जिले के तियारा स्थित उनके पैतृक निवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार उनके निधन का कारण हृदयाघात बताया जा रहा है। मनकोटिया शाहपुर विधानसभा क्षेत्र से पांच बार विधायक रहे और करीब चार दशक तक प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहे। उनके निधन की खबर से राजनीतिक और पूर्व सैनिक संगठनों में शोक की लहर है।

मनकोटिया ने वर्ष 1982 में शाहपुर विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पारी शुरू की थी। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग राजनीतिक दलों के साथ चुनावी राजनीति में अपनी भूमिका निभाई। वर्ष 1985 में वह कांग्रेस में शामिल हुए और बाद में वीरभद्र सिंह के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री भी बने। सार्वजनिक जीवन में उनकी पहचान एक पूर्व सैनिक, राजनेता और पूर्व सैनिकों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने वाले नेता के रूप में रही। उन्हें सेना की ओर से वेटरन अचीवर अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था।

वीरभद्र सिंह से राजनीतिक टकराव रहा

मनकोटिया और हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बीच लंबे समय तक राजनीतिक मतभेद रहे। मनकोटिया ने अपने राजनीतिक जीवन में तत्कालीन सरकार और वीरभद्र सिंह को लेकर कई आरोप लगाए थे। इसी दौर में सामने आए सीडी प्रकरण ने भी हिमाचल की राजनीति में काफी चर्चा बटोरी थी। बाद के वर्षों में यह मामला राजनीतिक बहस का हिस्सा बना रहा।

विधानसभा में रहते हुए मनकोटिया ने कई सार्वजनिक मुद्दों को उठाया। 1980 के दशक के विधानसभा रिकॉर्ड में भी उनके द्वारा सरकार की नीतियों और विभिन्न जनहित के विषयों पर सवाल उठाए जाने का उल्लेख मिलता है।

कई राजनीतिक दलों के साथ रहा सफर

मेजर मनकोटिया ने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में कांग्रेस के अलावा जनता दल और निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में भी चुनाव लड़ा। 2007 में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बाद वह फिर कांग्रेस में लौटे। 2012 का विधानसभा चुनाव भी उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर लड़ा, हालांकि इस बार भी उन्हें जीत नहीं मिली। इसी अवधि में उन्हें हिमाचल पर्यटन विकास से जुड़ी जिम्मेदारी भी दी गई थी।

2017 में कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने शाहपुर से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। बाद में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। वर्ष 2022 में भाजपा में शामिल होने के समय पार्टी नेतृत्व ने उनका स्वागत किया था।

पूर्व सैनिकों में रही मजबूत पकड़

राजनीति के साथ मेजर मनकोटिया का पूर्व सैनिकों के बीच भी प्रभाव रहा। वह लंबे समय तक पूर्व सैनिक लीग से जुड़े रहे और पूर्व सैनिकों से संबंधित मुद्दों को सार्वजनिक मंचों पर उठाते रहे। उनके सैन्य और राजनीतिक जीवन के इसी जुड़ाव के कारण कांगड़ा क्षेत्र में उनकी अलग पहचान बनी रही।

भाजपा नेताओं ने जताया शोक

मनकोटिया के निधन पर भाजपा के राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के नेताओं ने शोक व्यक्त किया। केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल और शांता कुमार समेत कई नेताओं ने उनके निधन पर संवेदना जताई।

मेजर विजय सिंह मनकोटिया का राजनीतिक जीवन कई दशकों तक हिमाचल की राजनीति के अलग-अलग दौर का हिस्सा रहा। विधायक, मंत्री, पूर्व सैनिक नेता और विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े रहने के कारण प्रदेश के सार्वजनिक जीवन में उनकी विशिष्ट पहचान बनी रही।

 

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