Uttarakhand: टिहरी झील को वैश्विक पर्यटन गंतव्य बनाने की तैयारी तेज

देहरादून, 24 सितंबर। टिहरी झील को अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार ने समग्र योजना तैयार करने की कवायद तेज कर दी है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सचिवालय में पर्यटन विभाग के साथ बैठक कर टिहरी लेक क्षेत्र के लिए व्यापक मास्टर प्लान और जोनल प्लान तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि झील और आसपास के क्षेत्र का विकास सुनियोजित तरीके से किया जाए, ताकि बेतरतीब निर्माण पर रोक लगाते हुए पर्यटन की संभावनाओं का बेहतर उपयोग किया जा सके।

मुख्य सचिव ने टिहरी झील के आसपास करीब आठ हजार हेक्टेयर क्षेत्र को समग्र मास्टर प्लान में शामिल करने को कहा। इसमें सरकारी और निजी दोनों तरह की भूमि को शामिल करते हुए जरूरत के अनुसार अलग-अलग जोन निर्धारित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि योजना बनाते समय क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों, स्थानीय जरूरतों, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और पर्यटन की संभावनाओं को ध्यान में रखना जरूरी है। इसके लिए सभी संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श करने के निर्देश भी दिए गए।

मास्टर प्लान तैयार करने में तकनीकी विशेषज्ञता हासिल करने के लिए स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर नई दिल्ली और भोपाल से सहयोग लेने की संभावनाओं पर विचार करने को कहा गया। मुख्य सचिव ने टिहरी झील क्षेत्र में अलग-अलग पर्यटन गतिविधियों को जोड़ते हुए प्रमुख आकर्षण केंद्र विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने इसके लिए चरणबद्ध योजना बनाने को कहा, ताकि प्राथमिकता के आधार पर परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा सके।

बैठक में पर्यटकों के ठहराव की अवधि बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया गया। इसके लिए केवल वाटर स्पोर्ट्स तक सीमित न रहकर एडवेंचर, ट्रैकिंग, नेचर, संस्कृति और विलेज टूरिज्म जैसी गतिविधियों को एक साथ विकसित करने की योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए। उद्देश्य यह है कि पर्यटक टिहरी क्षेत्र में एक-दो दिन या उससे अधिक समय तक रुककर विभिन्न गतिविधियों का अनुभव कर सकें।

मुख्य सचिव ने अप्रैल से जून के दौरान जलस्तर कम होने की स्थिति में भी पर्यटकों के लिए पर्याप्त गतिविधियां उपलब्ध कराने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाने को कहा। वर्षभर पर्यटन गतिविधियों को संचालित करने के लिए मौसम और जलस्तर के आधार पर गतिविधियों का कैलेंडर तैयार किया जाएगा। साथ ही नए ट्रैकिंग रूट और ट्रेल विकसित करने तथा आसपास के गांवों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने के निर्देश दिए गए।

गांवों में विलेज और कल्चरल विजिट की व्यवस्था विकसित करने पर भी विचार किया गया। इसके माध्यम से पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति, परंपराओं, खान-पान और ग्रामीण जीवन से परिचित कराने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।

मुख्य सचिव ने टिहरी झील को वैश्विक पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की पूरी कार्ययोजना और प्रस्तावित गतिविधियों पर विस्तृत प्रस्तुति तैयार करने को कहा, जिसे प्रधानमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके। उन्होंने अगली बैठक में टीएचडीसी के अधिकारियों को भी शामिल करने के निर्देश दिए, ताकि झील क्षेत्र के विकास से जुड़े विषयों पर समन्वित चर्चा हो सके।

बैठक में सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल, एपीसीसीएफ विवेक पाण्डेय, सुरेन्द्र मेहरा, सीसीएफ प्रसन्ना कुमार पात्रो, अपर सचिव विनीत कुमार, हिमांशु खुराना, अभिषेक रोहिला और जिलाधिकारी टिहरी नितिका खण्डेलवाल मौजूद रहीं।

 

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