हिमाचल प्रदेश के जलशक्ति विभाग ने पानी के बिलों के वितरण और भुगतान की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। विभाग ने अब शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के लिए ऑनलाइन बिलिंग को पूरी तरह अनिवार्य कर दिया है। इसका मुख्य उद्देश्य मैनुअल या ऑफलाइन बिलिंग के दौरान होने वाली अनियमितताओं और उपभोक्ताओं की शिकायतों को दूर करना है। विभाग ने इसके लिए एक विशेष ऑनलाइन बिलिंग मॉड्यूल भी तैयार कर लिया है, जिसके माध्यम से अब बिल जारी किए जाएंगे।
विभाग की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, अब किसी भी उपभोक्ता को मैनुअल बिल जारी नहीं किया जाएगा। केवल उन दूरदराज के क्षेत्रों में, जहां इंटरनेट की गंभीर समस्या है या तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, विशेष परिस्थितियों में ही ऑफलाइन बिल काटने की अनुमति होगी। हालांकि, ऐसी स्थिति में भी संबंधित कर्मचारियों को उच्च अधिकारियों से पहले औपचारिक मंजूरी लेनी होगी। बिना अनुमति के मैनुअल बिलिंग करना अब विभाग के नियमों के विरुद्ध माना जाएगा।
वर्तमान में हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में सभी पानी के कनेक्शनों पर मीटर नहीं लग पाए हैं। ऐसी स्थिति में उपभोक्ताओं को औसत खपत के आधार पर बिल भेजे जाते हैं। मंडल स्तर पर होने वाली मैनुअल बिलिंग के कारण अक्सर नए कनेक्शनों, बंद हो चुके कनेक्शनों और भुगतान के रिकॉर्ड में विसंगतियां देखने को मिलती हैं। कई बार उपभोक्ता ऑनलाइन या एडवांस भुगतान कर चुके होते हैं, लेकिन रिकॉर्ड अपडेट न होने के कारण उनसे दोबारा राशि वसूली की आशंका बनी रहती है। इन्हीं समस्याओं को समाप्त करने के लिए ऑनलाइन प्रणाली को सख्ती से लागू किया जा रहा है।
नई व्यवस्था के तहत नकद भुगतान को लेकर भी कड़े नियम बनाए गए हैं। अब विशेष अनुमति के बिना नकद राशि स्वीकार नहीं की जा सकेगी। यदि किसी अनिवार्य स्थिति में मैनुअल बिल जारी करना पड़ता है, तो संबंधित कर्मचारी की यह जिम्मेदारी होगी कि वह उपभोक्ता के पुराने ऑनलाइन और एडवांस भुगतान के रिकॉर्ड की पूरी जांच करे। मैनुअल बिल पर उपभोक्ता का वर्क एमआईएस अकाउंट नंबर दर्ज करना अनिवार्य होगा और यदि कोई एडवांस राशि जमा है, तो उसे बिल में पहले ही समायोजित करना होगा।
इसके साथ ही, यदि किसी क्षेत्र में ऑफलाइन बिल जारी किया गया है, तो सिस्टम उपलब्ध होते ही उसी समय अवधि का ऑनलाइन बिल भी सिस्टम में जनरेट करना होगा। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि मैनुअल और ऑनलाइन दोनों रिकॉर्ड में खपत की गई पानी की मात्रा और देय राशि का मिलान पूरी तरह सही हो। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी उपभोक्ता से दोबारा वसूली की स्थिति पैदा होती है, तो इसके लिए सीधे तौर पर सहायक अभियंता (एसडीओ) जिम्मेदार होंगे। वहीं, अधिशासी अभियंताओं को नियमित रूप से बिलों और बकाया राशि के रिकॉर्ड का मिलान करने के निर्देश दिए गए हैं।
उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए विभाग ने ‘एचपी-वाटर बिल’ मोबाइल एप्लीकेशन भी उपलब्ध कराई है। इस ऐप के जरिए उपभोक्ता घर बैठे अपने बिल देख सकते हैं, पुराने बिलों का विवरण प्राप्त कर सकते हैं और डिजिटल माध्यम से भुगतान कर सकते हैं। ऐप में एडवांस पेमेंट और तुरंत भुगतान के बाद रसीद प्राप्त करने की सुविधा भी दी गई है। जलशक्ति विभाग का मानना है कि इस डिजिटल पहल से न केवल राजस्व प्रबंधन में सुधार होगा, बल्कि उपभोक्ताओं को कार्यालयों के चक्कर काटने और बिलिंग की गड़बड़ियों से भी मुक्ति मिलेगी। वास्तविक आपात स्थिति को छोड़कर ऑनलाइन व्यवस्था से किसी भी प्रकार की लापरवाही को अब गंभीरता से लिया जाएगा।