शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने पंचायतों के प्रशासनिक और सुरक्षा ढांचे में एक बड़ा फेरबदल करते हुए पंचायत चौकीदारों के 566 रिक्त पदों को पूरी तरह समाप्त करने का निर्णय लिया है। सरकार ने इस पद को ‘डाइंग कैडर’ घोषित कर दिया है, जिसका अर्थ है कि अब भविष्य में इन पदों पर कोई नई स्थायी नियुक्ति नहीं की जाएगी। इस कदम के माध्यम से सरकार का लक्ष्य राजकोष पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को कम करना है।
विधायक इंद्र दत्त लखनपाल द्वारा विधानसभा में पूछे गए एक लिखित प्रश्न के उत्तर में सरकार ने इस नई व्यवस्था की जानकारी दी। सरकार के अनुसार, इन समाप्त किए गए पदों के स्थान पर अब ग्राम पंचायतों में 400 बहुउद्देशीय कार्यकर्ताओं की नियुक्ति की जाएगी। ये नियुक्तियां बाह्य सेवा (आउटसोर्सिंग) के आधार पर होंगी। इस बदलाव से राज्य सरकार को प्रतिवर्ष लगभग 1.70 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है।
आयुष विभाग में रिक्तियों की स्थिति
प्रदेश के आयुष विभाग में भी अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी का मुद्दा सदन में गूंजा। विधायक आशीष शर्मा के सवाल पर सरकार ने बताया कि वर्तमान में आयुष विभाग में आयुर्वेदिक फार्मेसी अधिकारियों के 111 पद खाली पड़े हैं। विभाग के अनुसार, कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति, त्यागपत्र और पदोन्नति जैसे कारणों से समय-समय पर ये पद रिक्त होते रहते हैं। हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि जनवरी 2023 से अब तक 81 आयुर्वेदिक फार्मेसी अधिकारियों की नियुक्तियां की जा चुकी हैं और शेष पदों को भरने की प्रक्रिया भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के तहत जारी है।
वन्यजीव संघर्ष और राहत राशि
चंबा जिले के भरमौर विधानसभा क्षेत्र में मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव पर भी सरकार ने आंकड़े पेश किए। पिछले तीन वर्षों में इस क्षेत्र में जंगली भालुओं के हमले की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। सरकार ने बताया कि भालुओं के हमले से संबंधित कुल 22 मामलों में प्रभावितों को 8.91 लाख रुपये की राहत राशि प्रदान की गई है।
चिकित्सा शिक्षा और बुनियादी ढांचे पर निवेश
प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा को सुदृढ़ करने के लिए सरकार ने पिछले तीन वर्षों में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। विधायक केवल सिंह पठानिया के प्रश्न के उत्तर में सरकार ने चिकित्सा संस्थानों के विस्तार का ब्योरा साझा किया।
| चिकित्सा शिक्षा और ढांचागत निवेश | विवरण और राशि |
| स्वीकृत नए पद | पिछले तीन वर्षों में 1,164 पद स्वीकृत किए गए। |
| भवन निर्माण बजट | मेडिकल और डेंटल कॉलेजों के निर्माण हेतु 779.32 करोड़ रुपये। |
| रखरखाव फंड | संस्थानों के भवनों के रख-रखाव के लिए 33.87 करोड़ रुपये। |
सरकार ने स्पष्ट किया कि चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के अधीन आने वाले आयुर्विज्ञान महाविद्यालयों और डेंटल कॉलेजों के बुनियादी ढांचे पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। भारी-भरकम बजट आवंटन के माध्यम से आधुनिक भवनों का निर्माण सुनिश्चित किया जा रहा है ताकि छात्रों और मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। शासन का मानना है कि इन सुधारों से प्रदेश की स्वास्थ्य प्रणाली में दूरगामी और सकारात्मक बदलाव आएंगे। इसके साथ ही, नई नियुक्तियों के माध्यम से अस्पतालों में विशेषज्ञ सेवाओं को भी मजबूती मिलेगी।
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