चमोली, 18 अगस्त। उत्तराखंड के चमोली जिले में टीएचडीसी की निर्माणाधीन सुरंग में हुए भीषण हादसे के बाद चल रहे राहत और बचाव अभियान में मंगलवार को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। पीपलकोटी के मायापुर (हाट-सियासैंण) क्षेत्र में पिछले पांच दिनों से जारी इस चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बचाव दलों ने एक और श्रमिक को मलबे से बाहर निकाल लिया है। इस रिकवरी के साथ ही अब सुरंग के भीतर लापता श्रमिकों की संख्या घटकर केवल एक रह गई है। प्रशासन ने अंतिम लापता व्यक्ति को खोजने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है और अभियान को ‘युद्धस्तर’ पर संचालित किया जा रहा है।
सुरंग से निकाले गए श्रमिक को तत्काल मौके पर तैनात एम्बुलेंस और मेडिकल टीम की सहायता से जिला चिकित्सालय गोपेश्वर भेजा गया है। अस्पताल प्रशासन को पहले ही हाई अलर्ट पर रखा गया था, ताकि वहां पहुँचते ही श्रमिक को विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में सर्वोत्तम उपचार मिल सके। फिलहाल श्रमिक की स्वास्थ्य स्थिति पर डॉक्टरों की टीम लगातार नजर बनाए हुए है।
कीचड़ और पानी की दोहरी चुनौती
रेस्क्यू अभियान में जुटी टीमों के लिए सुरंग के भीतर जमा भारी मात्रा में स्लज (कीचड़ और मलबे का मिश्रण) और पानी सबसे बड़ी बाधा बनकर उभरे हैं। 13 अगस्त को हुए हादसे के बाद से ही टनल के भीतर जलस्तर और मलबे की गहराई ने सर्च ऑपरेशन को बेहद धीमा और जोखिम भरा बना दिया था। इस चुनौती से निपटने के लिए प्रशासन ने अब तकनीकी रणनीति में बदलाव किया है।
| बचाव अभियान की मुख्य रणनीतियां |
| • स्लज निकासी: टनल के भीतर जमे गाढ़े कीचड़ को हटाने के लिए भारी मशीनों का निरंतर उपयोग। |
| • सक्शन पंप: टनल में भरे पानी को बाहर निकालने के लिए उच्च क्षमता वाले सक्शन पंप तैनात किए गए हैं। |
| • रास्ता सुगमीकरण: पानी और मलबा हटने से रेस्क्यू टीमों की आवाजाही के लिए रास्ता साफ किया जा रहा है। |
| • बारीकी से जांच: मलबे के बीच छिपे हर संभावित कोने की आधुनिक उपकरणों से छानबीन। |
एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय
इस महा-रेस्क्यू ऑपरेशन में जिला प्रशासन, स्थानीय पुलिस, एसडीआरएफ (SDRF) और एनडीआरएफ (NDRF) की टीमें एक साथ मिलकर काम कर रही हैं। विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल के कारण ही मलबे के भीतर से श्रमिकों तक पहुँचना संभव हो सका है। जिलाधिकारी गौरव कुमार स्वयं इस पूरे घटनाक्रम की निरंतर निगरानी कर रहे हैं और मौके पर तैनात अधिकारियों को पल-पल के निर्देश दे रहे हैं।
| रेस्क्यू ऑपरेशन की वर्तमान स्थिति |
| • हादसे की तिथि: 13 अगस्त 2026 |
| • ताजा अपडेट: एक और श्रमिक टनल से बाहर निकाला गया। |
| • लापता संख्या: अब केवल एक अंतिम श्रमिक की तलाश शेष। |
| • प्राथमिकता: लापता श्रमिक तक पहुँचने के लिए सघन तलाशी अभियान। |
अंतिम लापता की तलाश को सर्वोच्च प्राथमिकता
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जब तक सुरंग के भीतर फंसा आखिरी व्यक्ति बाहर नहीं निकल जाता, तब तक यह अभियान इसी तीव्रता के साथ जारी रहेगा। रेस्क्यू टीमें अब उन संवेदनशील हिस्सों की ओर बढ़ रही हैं, जहाँ भूधंसाव के कारण सबसे अधिक मलबा जमा हुआ था। मौके पर अतिरिक्त रोशनी, रसद और तकनीकी उपकरणों की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है ताकि रात के समय भी काम में कोई रुकावट न आए।
चमोली का यह टनल हादसा पूरे प्रदेश के लिए चिंता का विषय बना हुआ है, लेकिन एक-एक कर श्रमिकों के बाहर निकलने से परिजनों में उम्मीद की किरण जागी है। सरकार ने पहले ही इस हादसे की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए हैं, ताकि भविष्य में ऐसी आपदाओं को रोका जा सके। फिलहाल, पूरा फोकस उस एक अंतिम जिंदगी को बचाने पर केंद्रित है जो अब भी सुरंग की गहराइयों में कहीं ओझल है।