Uttarakhand: चमोली टनल हादसे में दो लापता लोगों की तलाश के लिए रेस्क्यू अभियान तेज पंपों से निकाला जा रहा पानी और मलबे के बीच चल रही सघन खोजबीन

चमोली, 16 अगस्त। चमोली जिले में टीएचडीसी की निर्माणाधीन सुरंग में हुए भीषण हादसे के बाद लापता दो श्रमिकों की तलाश के लिए रविवार को बचाव अभियान को और अधिक व्यापक और तीव्र कर दिया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विशेष दिशा-निर्देशों के तहत जिला प्रशासन और विभिन्न केंद्रीय व राज्य एजेंसियां टनल के भीतर छिपे हर संभावित कोने की बारीकी से जांच कर रही हैं। जिलाधिकारी गौरव कुमार स्वयं इस पूरे ऑपरेशन की कमान संभाले हुए हैं और घटना स्थल पर मौजूद रहकर राहत कार्यों की निरंतर निगरानी कर रहे हैं।

चुनौतियों को मात दे रही रेस्क्यू टीमें
सुरंग के भीतर जमा पानी और भारी मात्रा में मलबा बचाव कार्य में सबसे बड़ी बाधा बनकर उभरा है। इस समस्या से निपटने के लिए प्रशासन ने शक्तिशाली पंपों का उपयोग शुरू किया है। पंपों के माध्यम से टनल के भीतर भरे पानी को लगातार बाहर निकाला जा रहा है ताकि जलस्तर कम हो सके। पानी की निकासी होने से रेस्क्यू टीमों को उन हिस्सों तक पहुँचने में मदद मिल रही है जो अब तक पूरी तरह जलमग्न थे।

पानी हटाने के साथ-साथ टनल के भीतर फंसी भारी मशीनों और अन्य मलबे को हटाने का कार्य भी युद्धस्तर पर जारी है। आधुनिक कटर और भारी क्रेन की मदद से मलबे को व्यवस्थित तरीके से हटाया जा रहा है ताकि लापता लोगों की तलाश के लिए रास्ता सुगम हो सके।

सघन सर्च ऑपरेशन और आधुनिक तकनीक
बचाव अभियान में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी, स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन के जांबाज जवान जुटे हुए हैं। रेस्क्यू टीमें टनल के भीतर हर उस छोटी से छोटी जगह की सघन तलाशी ले रही हैं जहाँ लापता लोगों के फंसे होने की थोड़ी भी संभावना हो सकती है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जब तक अंतिम व्यक्ति की स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक यह अभियान इसी तीव्रता के साथ जारी रहेगा। मलबे के बीच फंसी जिंदगियों की तलाश के लिए थर्मल इमेजर और अन्य तकनीकी उपकरणों की सहायता भी ली जा रही है।

टनल हादसे का अब तक का लेखा-जोखा
• कुल निकाले गए लोग: 20
• सकुशल रेस्क्यू: 12 श्रमिक (जिला अस्पताल में उपचाराधीन)
• दुखद मृत्यु: 08 व्यक्ति
• अभी भी लापता: 02 श्रमिक

मजिस्ट्रेट जांच के जरिए तय होगी जवाबदेही
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस हादसे की गंभीरता को देखते हुए इसके कारणों और परिस्थितियों की विस्तृत जांच के लिए मजिस्ट्रेट जांच (Magisterial Inquiry) के आदेश दिए हैं। इस जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि टनल निर्माण के दौरान क्या सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई थी और हादसे के पीछे तकनीकी विफलता थी या मानवीय चूक। जिलाधिकारी गौरव कुमार ने बताया कि जांच दल ने साक्ष्य जुटाना शुरू कर दिया है और रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में कड़ी कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।

घायलों का चल रहा है उपचार
हादसे में सुरक्षित निकाले गए 12 श्रमिकों को तत्काल जिला चिकित्सालय गोपेश्वर में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की टीम उनकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। अधिकांश श्रमिक अब खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं, हालांकि वे गहरे मानसिक सदमे में हैं। जिला प्रशासन उनके परिजनों के साथ निरंतर संपर्क में है और उन्हें हर संभव सहायता प्रदान की जा रही है।

बचाव दल अब टनल के उस हिस्से की ओर बढ़ रहे हैं जहाँ भूधंसाव के कारण सबसे अधिक नुकसान हुआ था। प्रशासन ने उम्मीद जताई है कि अगले कुछ घंटों में लापता लोगों के बारे में कोई ठोस जानकारी मिल सकेगी। इस चुनौतीपूर्ण समय में पूरी देवभूमि उन लापता जिंदगियों की सलामती की प्रार्थना कर रही है। जिला प्रशासन ने मौके पर अतिरिक्त रोशनी और रसद की व्यवस्था भी की है ताकि रात के समय भी अभियान बिना रुके चलता रहे।

 

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