लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने इतिहास के कड़वे अनुभवों को साझा करते हुए देश के विभाजन और गुलामी के कारणों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत में कभी भी बल, बुद्धि या वैभव की कोई कमी नहीं थी, फिर भी देश को सदियों तक पराधीनता का दंश झेलना पड़ा। उन्होंने समाज को आगाह किया कि जो गलतियां अतीत में हुईं, उन्हें भविष्य में दोहराने से बचना होगा।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 1947 में हुआ भारत का विभाजन वैश्विक मानवता के इतिहास का सबसे काला अध्याय है। उन्होंने इस दुखद घटना के लिए कांग्रेस को सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा किया। मुख्यमंत्री ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उस समय सत्ता हासिल करने के लिए कांग्रेस इतनी अधिक आतुर थी कि उसने विभाजन जैसे शर्मनाक कृत्य को स्वीकार कर लिया। उन्होंने कहा कि यह उस जनता के साथ विश्वासघात था, जिसने कांग्रेस पर आंखें बंद करके भरोसा किया था।
गुलामी के पीछे छिपी असली वजह
मुख्यमंत्री ने इस बात पर गहरा आश्चर्य व्यक्त किया कि आखिर भारत जैसा समृद्ध देश गुलाम कैसे हो गया? उन्होंने तर्क दिया कि गुलामी की वजह कभी भी शक्ति या संसाधनों की कमी नहीं थी। प्राचीन काल से ही भारत दुनिया का सबसे वैभवशाली और बुद्धिमान राष्ट्र रहा है। उन्होंने कहा, “दुनिया में हमसे ज्यादा शक्तिशाली और धन-धान्य से परिपूर्ण कोई दूसरा देश नहीं था, फिर भी हमें गुलाम बनाया गया।”
| योगी आदित्यनाथ द्वारा चिह्नित गुलामी के दो मुख्य कारण |
| • आपसी अंतर्विरोध: समाज में जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर पैदा हुए मतभेद हमारी सबसे बड़ी कमजोरी बने। |
| • आंतरिक व बाहरी षड्यंत्र: जब समाज भीतर से विभाजित होता है, तो षड्यंत्रकारियों को अपनी चालों में सफल होने का सीधा अवसर मिल जाता है। |
षड्यंत्रों की सफलता और आपसी फूट
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत के भीतर षड्यंत्रकारी इसलिए सफल हो पाए क्योंकि हमने उन्हें मौका दिया। जब भी किसी राष्ट्र का समाज आपस में लड़ता है और छोटे-छोटे हितों के लिए राष्ट्रीय एकता को दांव पर लगाता है, तो उसका अंतिम दुष्परिणाम गुलामी के रूप में ही सामने आता है। भारत के मामले में भी आपसी फूट और बाहरी साजिशों का मेल ही हमारे पतन का कारण बना।
एकता और अखंडता की अपील
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के माध्यम से समाज के सभी वर्गों से अतीत की गलतियों से सीख लेने का आह्वान किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के समय में देश की एकता और अखंडता को सर्वोपरि रखना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। यदि हम अपने आपसी मतभेदों, जातिगत भेदभाव और भाषाई विवादों को मिटाकर एक रहेंगे, तो कोई भी शक्ति भारत की ओर आंख उठाकर नहीं देख सकेगी।
उन्होंने अंत में कहा कि इतिहास हमें केवल याद करने के लिए नहीं, बल्कि सुधार करने के लिए प्रेरित करता है। 1947 का विभाजन हमें याद दिलाता है कि एकता के अभाव में एक महान राष्ट्र को भी कितनी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। इसलिए, हमें हर कीमत पर भारत की अखंडता को अक्षुण्ण बनाए रखना होगा।