शिमला, 11 अगस्त। हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ी राहत देते हुए पेंशन और जीपीएफ (GPF) से जुड़ी सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल करने का निर्णय लिया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य पेंशन संशोधन और जीपीएफ निकासी के मामलों में पारदर्शिता लाना और इनके निपटारे में होने वाली अनावश्यक देरी को समाप्त करना है। वित्त विभाग की ओर से इस संबंध में राज्य के सभी प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों को सख्त दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
ऑनलाइन आवेदन हुआ अनिवार्य
नई व्यवस्था के तहत अब पेंशन संशोधन से जुड़े सभी मामले अनिवार्य रूप से केवल ऑनलाइन माध्यम से ही प्रस्तुत और निपटाए जाएंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब कागजी फाइलों के माध्यम से इन मामलों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके लिए ‘मानव संपदा’ पोर्टल को मुख्य आधार बनाया गया है। एंड-टू-एंड डिजिटाइजेशन की इस परियोजना में प्रधान महालेखाकार कार्यालय, जिला कोषालय, ट्रेजरी कार्यालय और आहरण एवं वितरण अधिकारियों (DDO) को एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया गया है ताकि पूरी प्रक्रिया निर्बाध रूप से चल सके।
ई-मेल से मिलेंगे डिजिटल दस्तावेज
डिजिटलीकरण की इस प्रक्रिया का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि अब पेंशनभोगियों को अपने दस्तावेजों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। पेंशन पेमेंट ऑर्डर (PPO), कम्युटेशन पेमेंट ऑर्डर (CPO) और ग्रेच्युटी पेमेंट ऑर्डर (GPO) जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित होंगे और संबंधित लाभार्थियों को सीधे उनके ई-मेल के माध्यम से भेज दिए जाएंगे। इससे न केवल कागजी कार्यवाही में कमी आएगी, बल्कि पूरी प्रक्रिया की निगरानी (ट्रैकिंग) करना और जवाबदेही तय करना भी आसान हो जाएगा।
| नई व्यवस्था और ब्याज दरें |
| • प्रभावी तिथि: नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) 15 जुलाई 2026 से लागू हो गई है। |
| • ब्याज दर: बचत निधि के लाभों की गणना 7.10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर के आधार पर की गई है। |
| • गणना का आधार: ब्याज की गणना तिमाही चक्रवृद्धि (Quarterly Compounding) आधार पर होगी। |
| • अनिवार्यता: सभी अधीनस्थ कार्यालयों और डीडीओ को डिजिटल नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। |
समूह बीमा योजना में भी बदलाव
पेंशन के साथ-साथ वित्त विभाग ने हिमाचल प्रदेश राज्य सरकारी कर्मचारी समूह बीमा योजना (GIS)-1984 के तहत बचत निधि के लाभों की नई तालिकाएं भी सार्वजनिक की हैं। विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, यह नई व्यवस्था 1 जुलाई 2026 से 30 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी। वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल माध्यम अपनाने से कर्मचारियों के सेवानिवृत्ति लाभों की गणना सटीक होगी और उनमें मानवीय त्रुटि की संभावना न्यूनतम हो जाएगी। इस क्रांतिकारी बदलाव से राज्य के हजारों सेवानिवृत्त कर्मचारियों को समयबद्ध तरीके से उनके वित्तीय लाभ मिलना सुनिश्चित होगा।