शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्य के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए एक मजबूत नेतृत्व का परिचय दिया है। वर्षों से लंबित कानूनी और प्रशासनिक मामलों में राज्य सरकार ने उनकी अगुवाई में उल्लेखनीय प्रगति की है। सुक्खू ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के जायज हक, विशेष रूप से भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से वित्तीय बकाया और बिजली हिस्सेदारी के साथ-साथ शानन जलविद्युत परियोजना जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने विभिन्न मंचों पर बीबीएमबी से हिमाचल प्रदेश के लगभग 4,200 करोड़ रुपये के बकाया और 13,066 मिलियन यूनिट बिजली की हिस्सेदारी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया है। उल्लेखनीय है कि लगभग 15 वर्ष पूर्व उच्चतम न्यायालय का निर्णय हिमाचल के पक्ष में आने के बावजूद राज्य को अब तक उसका पूरा हक नहीं मिल पाया है। इसके साथ ही, पंजाब पुनर्गठन अधिनियम 1966 के तहत चंडीगढ़ की भूमि और संपत्ति में 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी के दावे को भी सरकार मजबूती से आगे बढ़ा रही है, जिसकी वैधता को न्यायालय ने भी स्वीकार किया है।
शानन परियोजना और वाइल्ड फ्लावर हॉल में सफलता
शानन जलविद्युत परियोजना भी सुक्खू की प्राथमिकताओं में शामिल है। लीज की अवधि समाप्त होने के बावजूद पंजाब सरकार ने इसे हिमाचल को नहीं सौंपा है, जिस पर राज्य सरकार उच्चतम न्यायालय में प्रभावी पैरवी कर रही है। वहीं, वर्ष 2002 से लंबित वाइल्ड फ्लावर हॉल मामले में सरकार को बड़ी कानूनी जीत मिली है। सुक्खू के नेतृत्व में न्यायालय के समक्ष ठोस तथ्य पेश किए गए, जिसके परिणामस्वरूप यह संपत्ति अब राज्य सरकार के नियंत्रण में वापस आ गई है। इससे प्रदेश को अब सालाना 20 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हो रहा है।
| सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार की प्रमुख कानूनी उपलब्धियां |
| • बीबीएमबी बकाया: ₹4,200 करोड़ और बिजली हिस्सेदारी के लिए निरंतर पैरवी। |
| • वाइल्ड फ्लावर हॉल: 2002 से लंबित केस जीता, अब ₹20 करोड़ वार्षिक आय। |
| • कड़छम-वांगतू प्रोजेक्ट: रॉयल्टी 12% से बढ़ाकर 18% हुई, ₹150 करोड़ अतिरिक्त आय। |
| • चंडीगढ़ हिस्सेदारी: संपत्तियों में 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी के दावे पर कड़ा रुख। |
रॉयल्टी विवाद और किशाऊ परियोजना में बड़ा लाभ
राज्य सरकार ने 1,045 मेगावाट की कड़छम-वांगतू जलविद्युत परियोजना के रॉयल्टी विवाद में भी बड़ी सफलता हासिल की है। उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद हिमाचल प्रदेश की मुफ्त बिजली हिस्सेदारी 12 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत हो गई है, जिससे राज्य के खजाने में हर साल लगभग 150 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व जुड़ रहा है।
इसके अतिरिक्त, लगभग 15,000 करोड़ रुपये की किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना में भी हिमाचल के हितों को सुरक्षित किया गया है। पिछली भाजपा सरकार ने राज्य के हिस्से के रूप में केवल 800 करोड़ रुपये स्वीकार करने पर सहमति जताई थी, जिसे सुखविंदर सिंह सुक्खू ने खारिज कर दिया। सरकार के प्रयासों से अब केंद्र सरकार इस बात पर सहमत हो गई है कि लाभार्थी राज्य (दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा) जल घटक के लिए हिमाचल के हिस्से के लगभग 2,000 करोड़ रुपये वहन करेंगे। टोंस नदी पर बनने वाली इस परियोजना से हिमाचल को बिजली घटक के रूप में सालाना लगभग 600 करोड़ रुपये मूल्य की बिजली प्राप्त होगी।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने दोहराया कि वह हिमाचल प्रदेश के हितों के साथ कभी समझौता नहीं करेंगे। उनके लिए राज्य और यहां की जनता का कल्याण सर्वोपरि है और संसाधनों पर राज्य का वैध अधिकार सुरक्षित करना उनकी सरकार की मुख्य प्रतिबद्धता है।