चंबा। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। चंबा में मीडियाकर्मियों से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने सुधीर शर्मा की संपत्ति को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए और उन्हें अपनी आय के स्रोत सार्वजनिक करने की खुली चुनौती दी। सुक्खू ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता ही सबसे बड़ी ताकत है और यदि किसी जनप्रतिनिधि के पास आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति पाई जाती है, तो सरकार कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगी।
“मेरी संपत्ति आज भी वही, जो 20 साल पहले थी”
खुद को बेदाग बताते हुए मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि वे किसी भी स्तर की जांच का सामना करने के लिए हर समय तैयार हैं। उन्होंने अपनी सादगी का हवाला देते हुए कहा कि उनकी कुल चल-अचल संपत्ति में पिछले दो दशकों में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। सुक्खू ने दावा किया कि उन्होंने अपनी पूरी राजनीति ईमानदारी के साथ की है और कभी भी गलत तरीके से धन अर्जित नहीं किया। उन्होंने कहा कि जो लोग उन पर आरोप लगाते हैं, उन्हें पहले अपने गिरेबान में झांक कर देखना चाहिए।
सुधीर शर्मा की हिचकिचाहट पर उठाए सवाल
सुधीर शर्मा पर सीधा प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री ने पूछा कि यदि वे स्वयं को निर्दोष मानते हैं, तो जांच एजेंसियों से क्यों डर रहे हैं? सुक्खू ने एक घटना का जिक्र करते हुए सवाल किया कि जब सरकारी एजेंसी जांच के लिए उनके आवास पर पहुँची थी, तो उसे अंदर जाने से क्यों रोका गया? मुख्यमंत्री के अनुसार, जांच में बाधा डालना इस बात का संकेत है कि कहीं न कहीं कुछ छिपाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक सच्चा जनप्रतिनिधि कभी भी निष्पक्ष जांच से नहीं कतराता और वह हमेशा सहयोग के लिए तत्पर रहता है।
संपत्ति कुर्क कर गरीबों के लिए उपयोग करने की चेतावनी
मुख्यमंत्री ने कड़े लहजे में कहा कि यदि सुधीर शर्मा के पास आय से अधिक या बेनामी संपत्ति होने की पुष्टि होती है, तो प्रदेश सरकार उसे जब्त करने की प्रक्रिया शुरू करेगी। उन्होंने घोषणा की कि भ्रष्टाचार के माध्यम से बनाई गई ऐसी संपत्तियों का उपयोग समाज के गरीब और जरूरतमंद वर्गों के कल्याण के लिए किया जाएगा। सुक्खू ने सुधीर शर्मा को मशवरा दिया कि वे अपने आलीशान आवास के निर्माण में लगे धन और अपनी अन्य संपत्तियों के वास्तविक दस्तावेज जनता के सामने रखें ताकि सभी संदेह दूर हो सकें।
भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ और पारदर्शिता का संकल्प
प्रदेश की कार्यप्रणाली पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने दोहराया कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर अडिग है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य किसी को राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार बनाना नहीं है, बल्कि सिस्टम में जवाबदेही सुनिश्चित करना है। सुक्खू ने कहा कि सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति को अपनी आर्थिक स्थिति के प्रति पूरी तरह पारदर्शी होना चाहिए। जनता ने उन्हें सेवा के लिए चुना है, न कि निजी संपत्ति बढ़ाने के लिए।
जनता का विश्वास ही असली पूंजी
अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की असली पूंजी जनता का विश्वास होती है। उन्होंने विपक्षी नेताओं से अपील की कि वे बेवजह के आरोपों के बजाय तथ्यों के साथ बात करें। सुक्खू ने विश्वास जताया कि हिमाचल प्रदेश की जनता जागरूक है और वह सच और झूठ के बीच के अंतर को अच्छी तरह समझती है। उन्होंने कहा कि वे राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं और भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी यह लड़ाई अंतिम परिणाम तक जारी रहेगी। फिलहाल मुख्यमंत्री के इस बयान ने प्रदेश की राजनीति में एक नया भूचाल ला दिया है।
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