बीजिंग। चीन ने भारत की अध्यक्षता में इस वर्ष आयोजित होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन को सफल बनाने के लिए अपना आधिकारिक समर्थन व्यक्त किया है। बीजिंग में आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान चीनी विदेश मंत्रालय ने भारत के साथ सहयोग करने की इच्छा जताई। हालांकि, चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग व्यक्तिगत रूप से इस बैठक में शामिल होंगे या नहीं, इसे लेकर चीन ने अब तक अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से यह शिखर सम्मेलन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच भविष्य की रणनीति पर चर्चा होनी है।
ब्रिक्स की महत्ता और चीन का नजरिया
चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि ब्रिक्स समूह आज के समय में विकासशील देशों और उभरते हुए वैश्विक बाजारों के बीच सहयोग का एक सशक्त और महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। चीन ब्रिक्स की कार्यप्रणाली और इसके उद्देश्यों को बहुत अधिक महत्व देता है और इसकी गतिविधियों में हमेशा सक्रिय रूप से भाग लेता रहा है। माओ निंग ने स्पष्ट किया कि चीन इस वर्ष के अध्यक्ष देश के रूप में भारत का पूरी तरह समर्थन करता है और चाहता है कि सितंबर में होने वाला यह सम्मेलन सार्थक परिणामों के साथ संपन्न हो। चीन का मानना है कि ब्रिक्स के माध्यम से विकासशील देशों की आवाज विश्व पटल पर और अधिक मजबूती से गूंज सकती है।
शी चिनफिंग की भागीदारी पर बरकरार है संशय
राष्ट्रपति शी चिनफिंग की भारत यात्रा को लेकर जब प्रवक्ता से सीधा सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बहुत ही नपे-तुले शब्दों का इस्तेमाल किया। शी चिनफिंग की भागीदारी पर सस्पेंस को बरकरार रखते हुए माओ निंग ने कहा कि फिलहाल इस विषय पर उनके पास साझा करने के लिए कोई विशेष या नई जानकारी मौजूद नहीं है। आमतौर पर चीन अपने शीर्ष नेताओं की विदेश यात्राओं की घोषणा अंतिम समय में ही करता है। हालांकि, भारत और चीन के बीच पिछले कुछ वर्षों से चल रहे सीमा विवाद और कूटनीतिक तनाव को देखते हुए शी चिनफिंग का इस सम्मेलन में शामिल होना या न होना एक बड़ा भू-राजनीतिक संकेत माना जाएगा।
विस्तारित ब्रिक्स और शिखर सम्मेलन का कार्यक्रम
ब्रिक्स समूह का दायरा पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के इस समूह में साल 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात को आधिकारिक तौर पर शामिल किया गया था। इसके बाद, साल 2025 में इंडोनेशिया भी इस प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय समूह का हिस्सा बन चुका है। भारत की मेजबानी में इस वर्ष का यह प्रतिष्ठित शिखर सम्मेलन आगामी 12 और 13 सितंबर को आयोजित किया जाना है। इस बैठक में वैश्विक अर्थव्यवस्था, आतंकवाद के खिलाफ साझा जंग और सदस्य देशों के बीच व्यापारिक सुगमता जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा होने की संभावना है।
द्विपक्षीय वार्ता और संबंधों को सुधारने की कोशिश
इस बीच, भारत और चीन के बीच राजनयिक स्तर पर सक्रियता बढ़ती दिखाई दे रही है। भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने इसी सप्ताह चीन की दो दिवसीय महत्वपूर्ण यात्रा की। उन्होंने बीजिंग में चीनी उप विदेश मंत्री हुआ चुनयिंग सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों के साथ रणनीतिक बैठकें कीं। इन मुलाकातों का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच बनी पिछली सहमतियों को धरातल पर उतारना और आपसी राजनीतिक विश्वास को पुनः बहाल करना था। प्रवक्ता माओ निंग ने बताया कि बातचीत के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने और आपसी मतभेदों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने पर विस्तृत विमर्श हुआ। विक्रम मिसरी, जो पूर्व में चीन में भारत के राजदूत रह चुके हैं, उनके अनुभव का लाभ दोनों देशों के बीच जमी बर्फ को पिघलाने में लिया जा रहा है।