नई दिल्ली। नीट पेपर लीक को लेकर देश की राजधानी में मचे घमासान के बीच विपक्षी नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए छात्र आंदोलन और उस दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर राहुल गांधी ने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को निशाने पर लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से सरकार पर युवाओं (Gen Z) को डराने-धमकाने और उनकी आवाज को बलपूर्वक दबाने का गंभीर आरोप लगाया है।
युवाओं को डराने के आरोपों पर सरकार को दी चेतावनी
राहुल गांधी ने अपने बयान में कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह देश की युवा पीढ़ी को डराकर चुप नहीं करा सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने पहले तो शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज करवाया और उनकी हड्डियां तोड़ीं, और अब उन पर एफआईआर (FIR) दर्ज कर उन्हें कानूनी उलझनों में फंसाया जा रहा है। इतना ही नहीं, राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि प्रदर्शनकारी युवाओं के सोशल मीडिया अकाउंट्स को भी बंद करवाया जा रहा है ताकि उनकी आवाज जनता तक न पहुँच सके। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि सत्ता में बैठे लोग ‘भारत का अतीत’ हैं, जबकि ये छात्र ‘भारत का भविष्य’ हैं, इसलिए उनके साथ किए जा रहे बर्ताव को लेकर उन्हें सावधान रहना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग
छात्रों के प्रति अपनी एकजुटता प्रदर्शित करते हुए राहुल गांधी ने मांग की है कि जंतर-मंतर पर हुई इस पूरी घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्र न्याय के हकदार हैं और उनके साथ जो बर्बरता हुई है, उसकी सच्चाई सामने आना आवश्यक है। इसके लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक स्वतंत्र और उच्च-स्तरीय समिति (High-Level Committee) बनाने की पुरजोर वकालत की है। राहुल गांधी का मानना है कि केवल एक स्वतंत्र निकाय ही पुलिस की कार्रवाई और पेपर लीक की जड़ों तक पहुँचकर छात्रों को उचित न्याय दिला सकता है।
क्या था जंतर-मंतर का पूरा घटनाक्रम?
उल्लेखनीय है कि नीट परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं और पेपर लीक की घटनाओं से आक्रोशित होकर देशभर के हजारों युवाओं ने दिल्ली की सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया था। इस आंदोलन का मुख्य केंद्र जंतर-मंतर था। 20 जुलाई को जब ये छात्र जंतर-मंतर से संसद भवन की ओर बढ़ने का प्रयास कर रहे थे, तब पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच भारी झड़प हुई थी। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा था, जिसमें कई छात्र घायल हो गए थे। इसी कार्रवाई को विपक्ष ‘सरकारी दमन’ करार दे रहा है और लगातार सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है।
लोकतंत्र और युवाओं के भविष्य पर छिड़ी बहस
राहुल गांधी के इस हमले के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का आरोप है कि केंद्र सरकार परीक्षा माफियाओं को संरक्षण दे रही है और जब युवा अपने हक की बात करते हैं, तो उन्हें पुलिस के दम पर दबाया जाता है। राहुल गांधी का कहना है कि यह केवल एक परीक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह देश के लोकतंत्र और युवाओं के सपनों के साथ खिलवाड़ है। विपक्ष अब इस मुद्दे को लेकर संसद से लेकर सड़क तक सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है। फिलहाल, जंतर-मंतर की उस हिंसक झड़प की यादें अब भी छात्रों के मन में ताजा हैं और वे अपनी मांगों पर अडिग नजर आ रहे हैं।