Pakistan: चीन पाकिस्तान के रास्ते ईरान को पहुंचा रहा एयर डिफेंस प्रणाली

इस्लामाबाद। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में चल रही उन खबरों पर पाकिस्तान ने कड़ा रुख अपनाया है, जिनमें दावा किया गया था कि चीन पाकिस्तान के रास्ते ईरान को घातक हथियार भेजने की तैयारी में है। हाल ही में आई कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया था कि चीन 300 से 400 ‘मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम’ (MANPADS) की एक खेप ईरान को भेजने वाला है और इसके लिए पाकिस्तान के मार्ग का उपयोग किया जाएगा। अब पाकिस्तान और चीन दोनों ने ही इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए इन्हें सच्चाई से परे और मनगढ़ंत करार दिया है।


पाकिस्तानी सेना ने खबरों का किया खंडन
पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा ‘इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस’ (ISPR) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इन अटकलों पर विराम लगा दिया है। आईएसपीआर ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के माध्यम से ईरान को चीनी हथियारों की आपूर्ति से जुड़ी सभी खबरें बेबुनियाद हैं। सेना ने कहा कि इस प्रकार की भ्रामक जानकारी फैलाना क्षेत्र में पहले से व्याप्त तनाव को और अधिक बढ़ाने का प्रयास है। पाकिस्तान ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी देश को हथियारों के अवैध हस्तांतरण के लिए अपनी जमीन का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देगा।


क्या था न्यूज एजेंसी का दावा?
उल्लेखनीय है कि न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने बुधवार को एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें सूत्रों के हवाले से दावा किया गया था कि ईरान को चीनी एयर डिफेंस सिस्टम की पहली खेप जल्द ही प्राप्त हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, इन हथियारों की डिलीवरी पश्चिमी चीन के उरुमकी शहर से शुरू होकर पाकिस्तान के रास्ते ईरान तक पहुँचनी थी। हालांकि, रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि ये हथियार हवाई मार्ग से भेजे जाएंगे या सड़क के रास्ते। इस खबर के सामने आने के बाद रक्षा गलियारों में काफी हलचल मच गई थी।


अमेरिका और चीन के बीच पाकिस्तान का संतुलन
वर्तमान परिस्थितियों में पाकिस्तान एक बहुत ही नाजुक कूटनीतिक संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है। जहां एक ओर चीन उसका ‘सदाबहार’ मित्र है, वहीं दूसरी ओर वह अमेरिका के साथ भी अपने संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयास में है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया था। ऐसे में पाकिस्तान किसी भी ऐसी गतिविधि में शामिल होकर अमेरिका को नाराज नहीं करना चाहेगा जिससे उसकी कूटनीतिक स्थिति कमजोर हो। पाकिस्तान खुद को ईरान और अमेरिका के बीच एक शांतिदूत के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है।


मध्यस्थ की भूमिका में पाकिस्तान
पाकिस्तान ने ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष को रोकने के लिए कई बार मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। अन्य अंतरराष्ट्रीय शक्तियों के साथ मिलकर पाकिस्तान ने अप्रैल 2026 में दोनों देशों के बीच दो सप्ताह के अस्थायी युद्धविराम को सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया था। पाकिस्तान का तर्क है कि वह क्षेत्र में शांति का पक्षधर है, न कि हथियारों की होड़ बढ़ाकर युद्ध को भड़काने का। पाकिस्तान की सफाई इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है ताकि उसकी तटस्थ छवि बनी रहे।


ट्रंप प्रशासन का रुख और हथियारों की डील
ये खबरें ऐसे समय में आईं जब अमेरिका के भीतर युद्ध के कारण अपने ही हथियारों के भंडार पर दबाव बढ़ने की चर्चा हो रही थी। हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका के पास पर्याप्त सामरिक भंडार मौजूद है। फिलहाल चीन, पाकिस्तान और ईरान के बीच किसी भी प्रकार की आधिकारिक रक्षा डील की पुष्टि नहीं हुई है। पाकिस्तान ने पुरजोर तरीके से दोहराया है कि वह किसी भी हथियार ट्रांसफर की प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ऐसी अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए।

 

Pls read:Pakistan: पीओके के प्रदर्शनकारियों को बताया भारत जैसा दुश्मन- रक्षा मंत्री आसिफ

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *