शिमला। हिमाचल प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हजारों विद्यार्थियों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए ‘फ्री यूनिफॉर्म योजना’ को सुचारू रूप से लागू करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, पहली से आठवीं कक्षा तक के पात्र छात्र-छात्राओं को इस वर्ष भी स्कूल वर्दी के लिए सीधे वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बच्चों को शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध कराना और उनके अभिभावकों पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को कम करना है।
इन विद्यार्थियों को मिलेगा योजना का सीधा लाभ
सरकार ने इस कल्याणकारी योजना के लिए पात्रता के मापदंड स्पष्ट कर दिए हैं। योजना के अंतर्गत प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली सभी छात्राओं को शामिल किया गया है। वहीं, छात्रों की श्रेणी में केवल उन्हीं विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा जो अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) या गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) परिवार से संबंध रखते हैं। शिक्षा विभाग का अनुमान है कि इस निर्णय से प्रदेश के लाखों बच्चे लाभान्वित होंगे, जिससे स्कूलों में उनकी उपस्थिति और आत्मविश्वास में भी वृद्धि दर्ज की जाएगी।
डीबीटी के माध्यम से 600 रुपये का होगा भुगतान
पारदर्शिता सुनिश्चित करने और भ्रष्टाचार की संभावनाओं को खत्म करने के लिए सरकार ने डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर (DBT) प्रणाली को अपनाया है। इसके तहत प्रत्येक पात्र विद्यार्थी को वर्दी खरीदने के लिए 600 रुपये की एकमुश्त राशि प्रदान की जाएगी। यह धनराशि सीधे विद्यार्थी या उनके अभिभावकों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जाएगी। निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि इस राशि का प्राथमिक और एकमात्र उद्देश्य विद्यालय की निर्धारित वर्दी खरीदना ही है, ताकि शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित हो सके।
3 अगस्त तक डाटा उपलब्ध कराने के निर्देश
प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने प्रशासनिक तत्परता दिखाते हुए सभी जिला उपनिदेशकों को समय सीमा निर्धारित कर दी है। जिलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे 3 अगस्त तक अपने-अपने क्षेत्रों के पात्र विद्यार्थियों की सटीक संख्या और संबंधित कार्यालयों के बैंक खातों का पूर्ण विवरण निदेशालय को प्रेषित करें। इसके लिए प्रत्येक स्कूल के मुख्य अध्यापकों को अपने स्तर पर लाभार्थियों की सूची तैयार कर उसे निर्धारित प्रारूप में उच्च अधिकारियों को भेजने को कहा गया है। समय पर डाटा मिलने से बजट आवंटन और भुगतान की प्रक्रिया को जल्द पूरा किया जा सकेगा।
पीएम श्री और सामान्य स्कूलों के लिए अलग व्यवस्था
इस वर्ष निदेशालय ने प्रबंधन को और अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए एक नया कदम उठाया है। पीएम श्री (PM Shri) योजना के तहत आने वाले स्कूलों और राज्य के अन्य सामान्य सरकारी विद्यालयों के लिए अलग-अलग प्रस्ताव मांगे गए हैं। दोनों श्रेणियों के लिए निदेशालय ने पृथक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बजट का वितरण सटीक हो और किसी भी श्रेणी के विद्यार्थी को सहायता राशि प्राप्त करने में तकनीकी या प्रशासनिक देरी का सामना न करना पड़े। विभाग इस पूरी प्रक्रिया की निरंतर निगरानी कर रहा है।