अमृतसर। बेअदबी कानून में संशोधन और इससे जुड़ी शब्दावली को लेकर चल रहे लंबे विवाद के बीच पंजाब सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। बुधवार को सरकार की ओर से श्री अकाल तख्त साहिब सचिवालय में संशोधित कानून का 25 पन्नों का एक विस्तृत मसौदा और पूर्व में उठाई गई आपत्तियों के लिखित जवाब आधिकारिक रूप से सौंप दिए गए। यह कदम धार्मिक और राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि सिख समुदाय लंबे समय से इस कानून में बदलाव की मांग कर रहा था।
निर्धारित समय सीमा के अंतिम दिन सौंपा गया मसौदा
पंजाब सरकार की ओर से आम आदमी पार्टी के विधायक इंद्रबीर सिंह निज्जर और अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर दलविंदरजीत सिंह सचिवालय पहुँचे और इन दस्तावेजों को प्रभारी को सौंपा। गौरतलब है कि श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यवाहक जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने सरकार को बेअदबी कानून के विवादास्पद प्रावधानों और अनुचित शब्दावली में सुधार करने के लिए एक महीने का समय दिया था। बुधवार को इस समय सीमा का आखिरी दिन था, जिससे ठीक पहले सरकार ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी। इंद्रबीर सिंह निज्जर ने स्पष्ट किया कि सरकार ने अपना पक्ष रख दिया है और अब निर्णय की बारी सर्वोच्च धार्मिक संस्था की है।
पांच सिंह साहिबान करेंगे मसौदे की विस्तृत समीक्षा
श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से प्रतिनिधि जस्ककरण सिंह ने सरकार द्वारा सौंपे गए दस्तावेजों की प्राप्ति की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि यह मसौदा 25 पन्नों का है, जिसका अध्ययन बेहद बारीकी से किया जाएगा। चूंकि यह पूरा मामला खालसा पंथ की धार्मिक भावनाओं और मर्यादा से गहराई से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे सीधे तौर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। जस्ककरण सिंह के अनुसार, आगामी दिनों में होने वाली पांच सिंह साहिबानों की बैठक में इस मसौदे पर गंभीरता से मंथन किया जाएगा। अकाल तख्त का कहना है कि संस्था की राय पूरी तरह से अध्ययन और विद्वानों के सुझावों पर आधारित होगी।
मानसून सत्र में विधेयक पेश न करने की दी गई सलाह
धार्मिक संस्था ने पंजाब सरकार को एक महत्वपूर्ण परामर्श भी दिया है। श्री अकाल तख्त साहिब ने सरकार को सलाह दी है कि 3 अगस्त से शुरू होने वाले पंजाब विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में इस संशोधित बेअदबी विधेयक को तब तक पेश न किया जाए, जब तक कि धार्मिक नेतृत्व इसकी पूरी समीक्षा नहीं कर लेता। संस्था का मानना है कि जल्दबाजी में कानून बनाना भविष्य में पुनः विवाद पैदा कर सकता है। इससे यह संकेत मिलता है कि अकाल तख्त इस कानून की प्रत्येक धारा और तकनीकी पक्ष को सिख परंपराओं के अनुरूप सुनिश्चित करना चाहता है।
संयुक्त समिति के गठन का सुझाव और भविष्य की रणनीति
बैठक के दौरान अकाल तख्त की ओर से एक रचनात्मक सुझाव भी सामने आया है। जस्ककरण सिंह ने प्रस्तावित किया कि बेअदबी कानून को अंतिम रूप देने से पहले विद्वानों, कानूनी विशेषज्ञों और दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों की एक संयुक्त समिति बनाई जानी चाहिए। ऐसी समिति की देखरेख में तैयार किया गया कानून न केवल सर्वमान्य होगा, बल्कि सिख भावनाओं के साथ भी पूर्ण न्याय करेगा। फिलहाल, सभी की नजरें पांच सिंह साहिबानों की होने वाली बैठक पर टिकी हैं। इस बैठक के बाद जो सिफारिशें आएंगी, उन्हीं के आधार पर तय होगा कि पंजाब सरकार विधानसभा में इस कानून को लेकर आगे कैसे बढ़ेगी।
धार्मिक भावनाओं और कानूनी प्रावधानों के बीच संतुलन की कोशिश
पंजाब में बेअदबी की घटनाओं ने सामाजिक और राजनीतिक माहौल को हमेशा संवेदनशील बनाए रखा है। सरकार का यह नया मसौदा उन खामियों को दूर करने की एक कोशिश बताया जा रहा है, जिन पर पंथ के विद्वानों ने सवाल उठाए थे। विधायक इंद्रबीर सिंह निज्जर ने हालांकि यह साफ नहीं किया कि क्या सिखों की सभी आपत्तियों को मान लिया गया है, लेकिन उन्होंने सरकार की नीयत को साफ बताया। अब आगामी कुछ दिन पंजाब की राजनीति और धार्मिक व्यवस्था के लिए अत्यंत निर्णायक होने वाले हैं, क्योंकि अकाल तख्त की स्वीकृति के बिना इस संवेदनशील कानून को कानूनी रूप देना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती हो सकती है।