हरिद्वार। उत्तराखंड की धर्मनगरी हरिद्वार के पथरी क्षेत्र में दो साधुओं की नृशंस हत्या के मामले का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस ने इस दोहरे हत्याकांड में शामिल तीन फरार आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। जांच में सामने आया है कि इस पूरी वारदात को मंदिर की गद्दी और उत्तराधिकारी विवाद के चलते अंजाम दिया गया था। पुलिस ने आरोपितों के पास से हत्या में प्रयुक्त किए गए फावड़े और धारदार हथियार भी बरामद कर लिए हैं। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी थी।
मंदिर की गद्दी का विवाद बना हत्या का कारण
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस हत्याकांड का विवरण साझा किया। उन्होंने बताया कि शिवगढ़ गांव के शिव मंदिर में रहने वाले दो साधुओं, पारस गिरी और सेवा गिरी की हत्या कर उनके शवों को मंदिर परिसर में ही दबा दिया गया था। मृतक साधु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के निवासी थे। पुलिस जांच के अनुसार, घटना वाली रात पारस गिरी ने सेवा गिरी को पारंपरिक पगड़ी पहनाकर मंदिर की गद्दी का अगला उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था। यह निर्णय वहां मौजूद अन्य सेवादारों और आरोपितों को रास नहीं आया और इसी बात को लेकर विवाद शुरू हो गया।
सुनियोजित तरीके से दिया गया वारदात को अंजाम
पुलिस की पूछताछ में गिरफ्तार आरोपितों ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया है। आरोपितों की पहचान अंकुर उर्फ अखिल गिरी, आशु और राममिलन के रूप में हुई है, जो लक्सर के इस्माईलपुर गांव के रहने वाले हैं। आरोपितों ने बताया कि सेवा गिरी को उत्तराधिकारी बनाए जाने से वे बेहद नाराज थे। योजना के तहत उन्होंने सबसे पहले मंदिर में लगे सीसीटीवी कैमरों को बंद किया ताकि कोई साक्ष्य न बचे। इसके बाद उन्होंने धारदार पाठल से सेवा गिरी का गला रेत दिया और उनकी हत्या कर दी। बीच-बचाव करने आए पारस गिरी पर भी फावड़े से हमला कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया गया।
सबूत मिटाने के लिए शवों को मंदिर में ही दफनाया
हत्याकांड को अंजाम देने के बाद आरोपितों ने सबूत मिटाने की पूरी कोशिश की। उन्होंने मंदिर परिसर के भीतर ही एक गहरा गड्ढा खोदा और दोनों साधुओं के शवों को वहां दबा दिया। इसके अलावा, मंदिर में मौजूद एक अन्य व्यक्ति उत्तम झा को भी आरोपितों ने जान से मारने की धमकी दी। उन्होंने उत्तम झा का मोबाइल छीनकर उसका सिम तोड़ दिया और उसे चेतावनी दी कि वह यहां से कहीं दूर चला जाए और किसी को इस बारे में कुछ न बताए। वारदात को अंजाम देने के बाद तीनों आरोपित काठा पीर के जंगलों में छिप गए थे, जहां से पुलिस ने उन्हें धर दबोचा।
एक आरोपित अब भी फरार, पुलिस की तलाश जारी
पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से हत्या में इस्तेमाल किए गए दो फावड़े और एक पाठल बरामद कर ली है। एसएसपी नवनीत सिंह ने बताया कि इस जघन्य हत्याकांड में कुल चार लोग शामिल थे, जिनमें से तीन को गिरफ्तार कर लिया गया है। चौथा आरोपित अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है, जिसकी तलाश में पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी और दबिश दे रही हैं। पुलिस का दावा है कि जल्द ही चौथे आरोपित को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस खुलासे के बाद मंदिर परिसर की सुरक्षा और वहां रहने वाले साधु-संतों की व्यवस्था को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
धर्मनगरी में साधुओं की सुरक्षा पर उठे सवाल
हरिद्वार में इस तरह की घटना सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और संत समाज में गहरा रोष है। मंदिर परिसर के भीतर साधुओं की हत्या और फिर वहीं शवों को दबाने की घटना ने पुलिस की गश्त और खुफिया तंत्र पर भी सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपितों को जेल भेज दिया है। पुलिस अब इस मामले में अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है कि क्या इस गद्दी विवाद के पीछे कोई और बड़ी साजिश या बाहरी व्यक्ति का हाथ तो नहीं था। फिलहाल, आरोपितों के खिलाफ हत्या और साक्ष्य मिटाने की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।