Himachal: विधायक निधि के पैसे में धांधली मामले में घिरे देहरा के पूर्व विधायक होशियार सिंह

शिमला, 21 जुलाई। हिमाचल प्रदेश के देहरा निर्वाचन क्षेत्र के पूर्व विधायक होशियार सिंह की मुश्किलें विधायक निधि के दुरुपयोग मामले में बढ़ती नजर आ रही हैं। करीब 13 लाख रुपये के कथित घोटाले की जांच कर रही विजिलेंस टीम ने इस मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए हैं। जांच के दौरान उन 16 लाभार्थियों के बैंक खातों का पूरा ब्योरा खंगाला गया है, जिनके खातों में वर्ष 2023 और 2024 के दौरान विधायक निधि का पैसा हस्तांतरित किया गया था। विजिलेंस की टीम अब उन सभी व्यक्तियों तक पहुंच गई है जिनके नाम सरकारी रिकॉर्ड में सहायता राशि प्राप्त करने वालों के तौर पर दर्ज हैं।


बिना आवेदन के बैंक खातों में डाली गई सहायता राशि
विजिलेंस विभाग को इस मामले में शुरुआती शिकायत देहरा तहसील के गांव करियाड़ा निवासी सुमित और हरिपुर तहसील के गांव खैरियां निवासी अजीत पाल सिंह ने दी थी। शिकायतों में गंभीर आरोप लगाए गए थे कि विधायक निधि के तहत कई ऐसे लोगों के बैंक खातों में 50-50 हजार रुपये की राशि जमा की गई, जिन्होंने कभी किसी वित्तीय सहायता के लिए आवेदन ही नहीं किया था। जांच में यह बात सामने आई कि बिना किसी मांग या प्रक्रिया के सरकारी धन को निजी खातों में भेजा गया, जो प्रशासनिक नियमों का सीधा उल्लंघन है।


लाभार्थियों के बयानों ने खोली भ्रष्टाचार की पोल
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब विजिलेंस ने उन लोगों से पूछताछ की जिनके खातों में पैसे आए थे। जांच में शामिल लाभार्थियों ने स्वीकार किया कि उनके बैंक खातों में अचानक राशि आई थी। उन्होंने बताया कि पैसा आने के बाद तत्कालीन विधायक के निर्देश पर उन्होंने बैंक से नकद राशि निकाली और उसे वापस होशियार सिंह को सौंप दिया। लाभार्थियों के इन बयानों ने विधायक निधि के वितरण में अपनाई गई संदिग्ध कार्यप्रणाली को पूरी तरह उजागर कर दिया है।


दो वर्षों में हुआ सरकारी धन का दुरुपयोग
सरकारी दस्तावेजों और बैंक रिकॉर्ड के अनुसार, यह गड़बड़ी दो अलग-अलग वर्षों में की गई। रिकॉर्ड बताते हैं कि वर्ष 2023 में विभिन्न व्यक्तियों के माध्यम से छह लाख रुपये की सहायता राशि जारी की गई थी, जबकि वर्ष 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर सात लाख रुपये हो गया। कुल मिलाकर 13 लाख रुपये की विधायक निधि को सुनियोजित तरीके से फर्जी लाभार्थियों के जरिए निकाला गया। विजिलेंस का मानना है कि प्रथम दृष्टया यह सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने और जनता के धन के साथ धोखाधड़ी का मामला है।


विजिलेंस द्वारा एफआईआर दर्ज और कानूनी कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने आधिकारिक पुष्टि की है कि विजिलेंस ने होशियार सिंह के खिलाफ 16 जुलाई को एफआईआर दर्ज कर ली है। पूर्व विधायक के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 409 (सरकारी कर्मचारी द्वारा अमानत में खयानत) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। बैंक ट्रांजेक्शन और लाभार्थियों के बयानों को इस मामले में मुख्य आधार बनाया गया है।


जांच का अगला चरण और आरोपी का पक्ष
विजिलेंस विभाग अब इस मामले में अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच कर रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इस घोटाले में कुछ अन्य सरकारी अधिकारी भी शामिल थे। दूसरी ओर, आरोपों के घेरे में आए पूर्व विधायक होशियार सिंह का पक्ष जानने के लिए जब उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनका मोबाइल फोन बंद पाया गया। फिलहाल पुलिस और विजिलेंस की टीमें साक्ष्यों को और मजबूत करने में जुटी हैं और आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और गिरफ्तारियां या बड़ी कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है।

 

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