लखनऊ। राजधानी लखनऊ सहित उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों में हाल के दिनों में आग लगने की कई हृदयविदारक घटनाएं सामने आई हैं। इन हादसों में हुए जान-माल के भारी नुकसान ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों की चिंता बढ़ा दी है। इसी पृष्ठभूमि में, नगर विकास विभाग ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने और सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद, सभी विकास प्राधिकरणों, विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरणों और प्रदेश के समस्त विनियमित क्षेत्रों से उन भवनों की विस्तृत सूची मांगी है, जिनके लिए फायर अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
नगर विकास विभाग के इस सख्त निर्देश का मुख्य उद्देश्य राज्य भर की ऊंची इमारतों और व्यावसायिक परिसरों में अग्नि सुरक्षा की वर्तमान स्थिति का आकलन करना है। प्रशासन द्वारा निर्धारित प्रारूप के अनुसार, इस सूची में न केवल भवन मालिकों के नाम और पते शामिल होंगे, बल्कि भवनों की सुरक्षा से जुड़े कई तकनीकी पहलुओं का भी विवरण देना होगा। अधिकारियों को यह स्पष्ट करना होगा कि संबंधित भवन के पास वैध फायर एनओसी है या नहीं। साथ ही, मानचित्र स्वीकृति की तिथि और भवन के उपयोग (आक्युपेंसी) का प्रकार, जैसे आवासीय, व्यावसायिक, अस्पताल या शिक्षण संस्थान, का भी उल्लेख करना अनिवार्य किया गया है।
रिपोर्ट में भवनों की भौतिक संरचना पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। सूची में भवन की कुल ऊंचाई और उसके कुल भू-क्षेत्र (प्लॉट एरिया) की जानकारी देना आवश्यक है। अक्सर देखा गया है कि संकरी गलियों में बनी ऊंची इमारतें और घनी आबादी वाले क्षेत्रों के व्यावसायिक परिसर सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हैं, जिससे आग लगने की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य में भारी कठिनाई होती है। विभाग का मानना है कि इस डेटा के संकलन से उन क्षेत्रों और भवनों को चिन्हित करने में आसानी होगी, जो अग्नि सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील या जोखिम भरे हैं।
इस संबंध में उप निदेशक वीपी नागेश ने एक आधिकारिक पत्र जारी कर समस्त संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है। यह पत्र आवास एवं विकास परिषदों के आयुक्तों, विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्षों, विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरणों के अध्यक्षों के साथ-साथ विनियमित क्षेत्रों के जिलाधिकारियों और नियंत्रक अधिकारियों को भेजा गया है। पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि निर्धारित प्रारूप पर पूरी जानकारी तैयार कर उसे तत्काल निदेशक, आवास बंधु लखनऊ और शासन को प्रेषित किया जाए। इसमें किसी भी प्रकार की देरी को गंभीरता से लिया जाएगा।
इस कवायद का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू जवाबदेही तय करना है। सूची प्राप्त होने के बाद शासन स्तर पर इसकी समीक्षा की जाएगी। यदि कोई भवन अनिवार्य एनओसी के बिना संचालित पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्यवाही की जाएगी। सरकार का यह कदम प्रदेश में सुरक्षित शहरी विकास की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है। अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि भविष्य में मानचित्र स्वीकृति के समय ही अग्नि सुरक्षा के नियमों का कड़ाई से पालन हो। इस नई व्यवस्था से भवन स्वामियों और प्रबंधन समितियों पर भी दबाव बढ़ेगा कि वे अपनी इमारतों में स्थापित अग्निशमन उपकरणों को क्रियाशील रखें।