नई दिल्ली। सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (होर्मुज स्ट्रेट) में वाणिज्यिक जहाजों पर हाल ही में हुए घातक हमलों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ा दिया है। इन हमलों में एक भारतीय नागरिक की जान जाने और कई अन्य के घायल होने की खबर के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को इस घटना के विरोध में नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास के वरिष्ठ राजनयिकों को तलब किया। इनमें डिप्टी चीफ ऑफ मिशन (डीसीएम) मोहम्मद जवाद होसैनी भी शामिल हैं, जिनसे भारत ने इस घटना पर अपनी गहरी नाराजगी और औपचारिक विरोध दर्ज कराया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिणी रास्ते से गुजर रहे ‘मोम्बासा’ और ‘अल बहिया’ नामक दो तेल टैंकरों पर अचानक हमला किया गया। हमले के समय इन जहाजों पर बड़ी संख्या में क्रू मेंबर्स मौजूद थे। इस हमले की चपेट में आने से ‘मोम्बासा’ टैंकर पर तैनात एक भारतीय क्रू सदस्य की मौके पर ही मौत हो गई। हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि जहाज पर सवार आठ अन्य लोग भी घायल हुए हैं। विदेश मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, घायलों में छह भारतीय और दो यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं, जिनमें से चार की स्थिति गंभीर बनी हुई है।
इस घटना के बाद संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने भी अपनी सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंता जताई है। यूएई के रक्षा मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि हमले के कारण दोनों टैंकरों में भीषण आग लग गई थी, जिससे जहाजों को काफी नुकसान पहुंचा है। हालांकि, चालक दल की मुस्तैदी और राहत कार्यों के चलते समय रहते आग पर काबू पा लिया गया, जिससे एक बड़ी पर्यावरणीय और मानवीय आपदा टल गई।
यूएई ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला और गंभीर उल्लंघन करार दिया है। यूएई का मानना है कि इस तरह की हिंसक कार्रवाइयां न केवल समुद्री व्यापारिक मार्गों को जोखिम में डालती हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए भी बड़ा खतरा पैदा करती हैं। यूएई प्रशासन ने स्पष्ट किया कि उन्हें अपनी क्षेत्रीय अखंडता, नागरिकों और वहां रहने वाले निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का पूरा अधिकार है। उन्होंने इस बढ़ते तनाव के लिए जिम्मेदार पक्षों को चेतावनी देते हुए कहा कि वे किसी भी प्रकार के खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं।
भारत ने ईरानी राजनयिकों के साथ बातचीत में इस बात पर जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी देशों की साझी जिम्मेदारी है। भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर भारत सरकार ने चिंता जताते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।
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