शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश के आर्थिक हितों और विकास कार्यों को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। शिमला में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि किशाऊ बांध परियोजना को लेकर उनकी सरकार ने जो कड़ा रुख अपनाया है, उससे प्रदेश को भविष्य में बड़ा आर्थिक लाभ होने वाला है। उन्होंने कहा कि अगर राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार होती, तो किशाऊ बांध से जुड़े पुराने और घाटे वाले समझौते को स्वीकार कर लिया जाता, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ पड़ता।
सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के अनुसार, वर्ष 2023 में उनकी सरकार ने इस पुराने समझौते को पूरी तरह से नकार दिया और हिमाचल के अधिकारों की मजबूती के साथ पैरवी की। इस कूटनीतिक जीत का सुखद परिणाम यह रहा कि अब इस बांध परियोजना से हिमाचल प्रदेश को हर साल लगभग 600 करोड़ रुपये की निश्चित आय होगी। मुख्यमंत्री ने इसे कांग्रेस सरकार की एक बड़ी उपलब्धि बताया और कहा कि प्रदेश के हितों की रक्षा करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
सामाजिक कल्याण और आपदा प्रबंधन पर जोर
सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में समाज के कमजोर वर्गों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं प्रभावी रूप से लागू की गई हैं। इनमें अनाथ बच्चों, विधवाओं, एकल नारियों और मेधावी विद्यार्थियों के साथ-साथ जरूरतमंद परिवारों के उत्थान पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
प्राकृतिक आपदाओं के समय सरकार की सक्रियता का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि आपदा में पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए मकानों के लिए मुआवजे की राशि को 1.30 लाख रुपये से बढ़ाकर सीधे 8 लाख रुपये कर दिया गया है। मुआवजे की यह दर देश के अन्य राज्यों के मुकाबले सबसे अधिक है। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार पर हिमाचल की अनदेखी करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की घोषणा के बावजूद आपदा राहत के लिए तय 1,500 करोड़ रुपये की राशि अब तक राज्य को नहीं मिली है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश के चारों भाजपा सांसदों ने इस गंभीर मुद्दे पर केंद्र के समक्ष प्रभावी ढंग से बात नहीं रखी। व्यक्तिगत योगदान का उदाहरण देते हुए सुक्खू ने बताया कि उन्होंने खुद आपदा प्रभावितों की मदद के लिए अपनी जमा पूंजी से 51 लाख रुपये दान किए हैं।
जलशक्ति विभाग के नियमों का हुआ संकलन
इसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने जलशक्ति विभाग के लिए एक ऐतिहासिक दस्तावेज ‘वाटर लाज आफ हिमाचल’ का विमोचन भी किया। पहली बार विभाग से जुड़े सभी नियमों, कानूनों और प्रशासनिक नीतियों को एक ही पुस्तक में समाहित किया गया है। सुक्खू ने कहा कि यह संकलन अधिकारियों, अभियंताओं, ठेकेदारों और आम जनता के लिए मार्गदर्शक का काम करेगा।
इस पुस्तक के आने से जलापूर्ति, सिंचाई और सीवरेज सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। विभिन्न मंडलों में कार्यरत अधिकारियों के लिए अब नियमों में एकरूपता होगी, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि हिमाचल प्रदेश ने जल जीवन मिशन के तहत 99.9 प्रतिशत घरों तक नल से जल पहुंचाने का ऐतिहासिक लक्ष्य प्राप्त कर लिया है। बेहतर जल प्रबंधन और उत्कृष्ट सेवाओं के लिए प्रदेश को वर्ष 2026 का राष्ट्रीय जल पुरस्कार भी प्रदान किया गया है।
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