Uttarakhand: देवभूमि को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनाएगी धामी सरकार, मोरारी बापू की रामकथा के समापन पर बोले मुख्यमंत्री

हरिद्वार। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को हरिद्वार के प्रेमनगर आश्रम में आयोजित पूज्य मोरारी बापू की ‘श्रीराम कथा’ के समापन समारोह में शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि देवभूमि उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में विकसित करना उनकी सरकार का मुख्य लक्ष्य है। मुख्यमंत्री ने मोरारी बापू को भारतीय संस्कृति का जीवंत संवाहक बताते हुए कहा कि उनके मुख से निःसृत श्रीराम के आदर्श और विचार पूरी दुनिया को सनातन दर्शन की राह दिखा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने वैश्विक शांति के लिए भारतीय संस्कृति के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आज के चुनौतीपूर्ण समय में भारत का “वसुधैव कुटुम्बकम्” का संदेश ही विश्व को युद्ध और आतंकवाद जैसी समस्याओं से मुक्ति दिला सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में चल रहे सांस्कृतिक पुनर्जागरण का जिक्र करते हुए धामी ने बताया कि उत्तराखंड सरकार भी इसी कड़ी में केदारखंड-मानसखंड मंदिर माला मिशन, हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर और शारदा कॉरिडोर जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर तेजी से काम कर रही है।

कुंभ-2027 की महातैयारी का संकल्प
आगामी कुंभ-2027 को लेकर मुख्यमंत्री ने सरकार का विजन स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि आगामी कुंभ को न केवल दिव्य और भव्य बनाया जाएगा, बल्कि सुरक्षा और तकनीक के लिहाज से भी यह एक मिसाल होगा। उन्होंने कुंभ को सामाजिक समरसता और सनातन संस्कृति का महापर्व बताते हुए कहा कि राज्य सरकार ‘विकास भी और विरासत भी’ के मूल मंत्र के साथ आगे बढ़ रही है।

पुष्कर सिंह धामी ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे भगवान श्रीराम के आदर्शों को केवल सुनें नहीं, बल्कि अपने जीवन में उतारें। उन्होंने विश्वास जताया कि संतों के सानिध्य और जनता के सहयोग से उत्तराखंड अपनी आध्यात्मिक गरिमा को विश्व पटल पर और अधिक मजबूती से स्थापित करेगा।

समारोह में परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज, पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी और जिलाधिकारी मयूर दीक्षित सहित कई वरिष्ठ अधिकारी एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने मोरारी बापू का आशीर्वाद लिया और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। ऋषिकेश और हरिद्वार के संतों ने भी राज्य सरकार के आध्यात्मिक प्रयासों की सराहना की।

 

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