गोपेश्वर (चमोली)। बदरीनाथ धाम में दान और चढ़ावा चोरी के गंभीर आरोपों ने बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) की कार्यप्रणाली को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। इस पूरे प्रकरण में सबसे ज्यादा चर्चा उस अधिकारी की हो रही है, जिसकी तरक्की की कहानी किसी तिलिस्म से कम नहीं है। मात्र 23 वर्षों में एक अस्थायी कर्मचारी से प्रोटोकॉल अधिकारी की कुर्सी तक पहुंचने का यह सफर नियमों की अनदेखी और भ्रष्टाचार की शिकायतों से भरा पड़ा है।
आरोपी अधिकारी ने साल 2003 में एक साधारण अस्थायी कर्मचारी के रूप में मंदिर समिति में अपनी सेवा शुरू की थी। इसके बाद उन्होंने तरक्की की ऐसी सीढ़ी चढ़ी कि वरिष्ठ कर्मचारियों को भी पीछे छोड़ दिया। आरोप है कि उनके हर प्रमोशन में नियमों को ताक पर रखा गया और बीकेटीसी की सेवा नियमावली की धज्जियां उड़ाई गईं।
पदोन्नति का विवादित सफर
इस अधिकारी की तरक्की के पड़ाव हैरान करने वाले हैं:
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2014: अस्थायी कर्मचारी से सीधे ‘इंटरनेट को-आर्डिनेटर’ के पद पर स्थायी नियुक्ति मिली और 2,800 ग्रेड पे दिया गया। जबकि सेवा नियमावली में इस पद के बाद पदोन्नति का कोई प्रावधान ही नहीं है।
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2017: वरिष्ठता को दरकिनार करते हुए उन्हें सीधे 4,600 ग्रेड पे के साथ अध्यक्ष का वैयक्तिक सहायक बना दिया गया। कर्मचारियों का कहना है कि बीच का 4,200 ग्रेड पे का स्तर पूरी तरह गायब कर दिया गया।
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2026: तरक्की का यह सिलसिला प्रोटोकॉल अधिकारी के पद तक जा पहुंचा। इसी पद पर रहते हुए उन्हें बदरीनाथ धाम में ‘थाली भेंट गणना’ (चढ़ावे की गिनती) जैसा संवेदनशील प्रभार सौंपा गया।
महत्वपूर्ण फाइलों पर ‘कब्जा’
भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच एक और बड़ी लापरवाही सामने आई है। नियमों के अनुसार, मंदिर समिति के कर्मचारियों की सीआर (चरित्र पंजिका) फाइल मुख्यालय—ऊखीमठ या ज्योतिर्मठ के कार्यालय में होनी चाहिए। लेकिन जांच में पता चला कि इस अधिकारी ने अपनी फाइल अधिकारियों की पहुंच से दूर अपने पास ही रखी है। ज्योतिर्मठ कार्यालय में हाल ही में हुए दस्तावेजों के निरीक्षण के दौरान यह गंभीर चूक पकड़ी गई।
बदरीनाथ धाम में दान गणना की प्रक्रिया (बाक्स)
मंदिर में चढ़ावे की पारदर्शिता के लिए एक स्थापित प्रक्रिया है, जिसे लेकर अब संदेह जताया जा रहा है:
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खाली करना: पांच दान पात्रों को अधिकारियों, कर्मचारियों और आम श्रद्धालुओं की मौजूदगी में खोला जाता है।
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निगरानी: पूरी गिनती सीसीटीवी कैमरों और वरिष्ठ अधिकारियों की देखरेख में होती है।
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बैंक सुपुर्दगी: गिनती के बाद राशि बैंक कर्मचारी को सौंप दी जाती है, जो दोबारा मिलान करता है।
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रिकॉर्ड: सेवा देने वाले श्रद्धालुओं का पूरा रिकॉर्ड मंदिर समिति के पास होता है।
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जमा: गिनती के बाद नकदी सीधे बैंक और कीमती वस्तुएं समिति के खजाने में जमा होती हैं। श्रद्धालुओं की संख्या के आधार पर यह प्रक्रिया हर दूसरे या तीसरे दिन होती है।
आरोप है कि प्रोटोकॉल अधिकारी के रूप में इस व्यक्ति की तैनाती के बाद से ही ‘थाली भेंट गणना’ और ‘प्रोटोकॉल व्यवस्था’ में भारी अनियमितताएं शुरू हुईं। वरिष्ठ कर्मचारियों द्वारा समय-समय पर किए गए विरोध को अनसुना कर दिया गया। फिलहाल, इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच चल रही है, जिससे उम्मीद है कि मंदिर की साख पर लगे इस बट्टे के पीछे के असली चेहरों और भ्रष्ट तंत्र का पर्दाफाश होगा। श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में अब सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है।