चंडीगढ़। पंजाब में गर्मियों की छुट्टियों के बाद स्कूलों के खुलते ही नशे के खिलाफ जारी ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ अभियान एक नए और प्रभावी चरण में प्रवेश कर गया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इस लड़ाई का मुख्य मोर्चा पुलिस थानों और नशामुक्ति केंद्रों से हटाकर अब स्कूलों और कक्षाओं तक पहुंचा दिया है। सरकार का मानना है कि नशे की जड़ पर प्रहार करने के लिए बच्चों को बचपन से ही जागरूक और मानसिक रूप से मजबूत बनाना अनिवार्य है। इस दिशा में हजारों शिक्षक अब एक सुरक्षा कवच के रूप में कार्य कर रहे हैं।
शिक्षकों और प्रिंसिपलों का क्षमता निर्माण
राज्य सरकार ने उन लोगों पर निवेश करना शुरू किया है जो किशोरों के साथ सबसे अधिक समय बिताते हैं। ‘टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेस’ (TISS) के सहयोग से सीमावर्ती जिलों सहित नौ जिलों के 1,400 से अधिक स्कूल प्रमुखों को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है। उन्हें यह सिखाया गया है कि वे बच्चों में नशीली दवाओं के सेवन के शुरुआती संकेतों को कैसे पहचानें और उनके साथ सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार करते हुए उनकी मानसिक सेहत का ध्यान रखें।
अमृतसर में कक्षा 9वीं से 12वीं तक के 3,000 से अधिक शिक्षकों के लिए कार्यशालाएं आयोजित की गईं। इन प्रशिक्षणों के परिणाम उत्साहजनक रहे हैं, जहां 85 प्रतिशत शिक्षकों ने स्वीकार किया कि किशोरों में नशे की लत का सीधा संबंध मानसिक तनाव, साथियों के दबाव और भावनात्मक चुनौतियों से है।
माइंडफुलनेस प्रोग्राम से बढ़ेगी मानसिक मजबूती
नशे की लत के मूल कारणों में से एक तनाव है। इससे निपटने के लिए मान सरकार ने पूरे राज्य के सरकारी स्कूलों (कक्षा 6 से 12वीं) में ‘माइंडफुलनेस प्रोग्राम’ शुरू किया है। इसके तहत हर सुबह 30 मिनट का एक सत्र होता है जिसमें श्वास व्यायाम, ध्यान, सकारात्मक संकल्प और कृतज्ञता का अभ्यास कराया जाता है। मोहाली के 210 स्कूलों में इसके पायलट प्रोजेक्ट के दौरान 83 प्रतिशत छात्रों ने माना कि वे अब कठिन परिस्थितियों का सामना बिना किसी भारी तनाव के करने में सक्षम हैं।
भारत का पहला साक्ष्य-आधारित नशा विरोधी पाठ्यक्रम
पंजाब ने पिछले साल अगस्त में कक्षा 9वीं से 12वीं के छात्रों के लिए भारत का पहला साक्ष्य-आधारित नशा विरोधी पाठ्यक्रम पेश किया। ‘जे-पाल दक्षिण एशिया’ के व्यवहार वैज्ञानिकों के सहयोग से विकसित यह पाठ्यक्रम 3,658 स्कूलों के लगभग आठ लाख छात्रों को कवर करता है। 6,500 से अधिक प्रशिक्षित शिक्षक डॉक्यूमेंट्री, क्विज और चर्चाओं के माध्यम से छात्रों को नशे के खतरे, साथियों के दबाव से निपटने और ‘न’ कहने के व्यावहारिक कौशल सिखा रहे हैं।
सुरक्षा के अन्य महत्वपूर्ण उपाय
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अनाम शिकायत पेटियां (Anonymous Tipping Boxes): स्कूलों में ऐसी पेटियां लगाई गई हैं जहां छात्र बिना किसी डर या बदनामी के नशे से संबंधित संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी गोपनीय रूप से दे सकते हैं।
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सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण: नशे को केवल एक अपराध नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के नजरिए से देखा जा रहा है।
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सामूहिक टीम वर्क: शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के अनुसार, यह एक टीम वर्क है जिसमें शिक्षक समाज के परिवर्तनकारी के रूप में केंद्रीय भूमिका निभा रहे हैं।
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देश में नंबर 1 प्रदर्शन: पंजाब पहले ही नीति आयोग की स्कूली शिक्षा रिपोर्ट 2026 में देश में नंबर 1 स्थान पर है, और अब नशे के खिलाफ यह मॉडल पूरे देश के लिए मिसाल बन रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि नशे से बचाए गए प्रत्येक बच्चे का अर्थ है एक सुरक्षित परिवार और एक सुरक्षित भविष्य। राज्य का उद्देश्य केवल बच्चों को डराना नहीं, बल्कि उन्हें सही निर्णय लेने की शक्ति और ज्ञान से लैस करना है। इस अभियान के जरिए पंजाब सरकार एक ऐसी नींव रख रही है जो आने वाली पीढ़ियों को नशे के अभिशाप से मुक्त रखेगी। अमृतसर की शिक्षिका बलविंदर कौर ने बताया कि छात्र इन कक्षाओं में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं, जिससे यह सुनिश्चित हो गया है कि भविष्य के किशोर इस बुराई से दूर रहेंगे।
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