देहरादून। उत्तराखंड की दो सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक पर्यटन परियोजनाओं, केदारनाथ और हेमकुंड साहिब रोपवे, पर चल रहा कार्य अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। केदारनाथ रोपवे के निर्माण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए लिडार (LIDAR) सर्वे और वीडियोग्राफी का काम सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया गया है। अब संबंधित निर्माण कंपनी ने धरातल पर मिट्टी और चट्टानों की मजबूती को परखने के लिए जियो-टेक्निकल जांच शुरू कर दी है, जिससे भविष्य में रोपवे के ढांचों को सुरक्षा प्रदान की जा सके।
सचिवालय में आयोजित उत्तराखंड रोपवे डेवलपमेंट लिमिटेड (यूआरडीएल) की निदेशक मंडल की दूसरी बैठक में इन परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति का ब्यौरा पेश किया गया। इस दौरान नेशनल हाइवेज लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड के अधिकारियों ने बताया कि केदारनाथ रोपवे के लिए गौरीकुंड और सोनप्रयाग स्टेशनों के निर्माण हेतु आवश्यक भू-तकनीकी सर्वेक्षण पहले ही पूरे किए जा चुके हैं। इसके साथ ही, ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी क्षेत्रों में रोपवे का सबसे सुरक्षित और प्रभावी मार्ग सुनिश्चित करने के लिए टोपोग्राफी सर्वे का कार्य भी पूर्ण कर लिया गया है।
अलाइनमेंट और व्यावहारिक परीक्षण
सोनप्रयाग से गौरीकुंड होते हुए केदारनाथ धाम तक के प्रस्तावित मार्ग का अलाइनमेंट तैयार हो चुका है। तकनीकी पहलुओं और सुरक्षा मानकों की बारीकी से जांच के बाद, जून 2026 तक इस अलाइनमेंट पर अंतिम मुहर लगा दी जाएगी। इस परियोजना की व्यावहारिक तैयारियों को परखने के लिए देहरादून से सोनप्रयाग तक कंटेनरों के माध्यम से लॉजिस्टिक्स का ड्राई रन परीक्षण भी सफलतापूर्वक किया गया है, ताकि निर्माण सामग्री के परिवहन में आने वाली चुनौतियों का आकलन किया जा सके।
हेमकुंड साहिब रोपवे की स्थिति
हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजना के संबंध में बैठक में जानकारी दी गई कि वर्तमान में भूमि सर्वेक्षण का कार्य प्रगति पर है। हालांकि, ऊंचाइयों पर खराब मौसम और धुंध के कारण ड्रोन सर्वे की प्रक्रिया में कुछ बाधाएं आई थीं, लेकिन अब अंतिम चरण के कार्यों के लिए डीजीपीएस और लिडार सर्वे को पुन: सक्रिय कर दिया गया है।
यात्रा समय में आएगी भारी कमी
इन दोनों रोपवे परियोजनाओं के धरातल पर उतरने के बाद श्रद्धालुओं की यात्रा न केवल सुगम होगी, बल्कि समय की भी भारी बचत होगी। वर्तमान में केदारनाथ का 13 किलोमीटर लंबा पैदल मार्ग तय करने में श्रद्धालुओं को कई घंटे लग जाते हैं, लेकिन रोपवे शुरू होने के बाद यह दूरी मात्र 30 से 40 मिनट में तय की जा सकेगी। इसी तरह, हेमकुंड साहिब की कठिन चढ़ाई भी लगभग 45 मिनट के भीतर पूरी हो जाएगी।
प्रशासनिक निर्देश और प्राथमिकताएं
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने बैठक के दौरान अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि इन परियोजनाओं में आ रही वन विभाग की अनुमतियों (फॉरेस्ट क्लीयरेंस) की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। उन्होंने जोर दिया कि सभी प्रकार के सर्वेक्षण कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरे होने चाहिए।
परियोजना की मुख्य विशेषताएं और प्रशासनिक निर्देश
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केदारनाथ रोपवे: सोनप्रयाग से केदारनाथ तक का अलाइनमेंट तैयार, जून 2026 में मिलेगी अंतिम स्वीकृति।
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समय की बचत: 13 किमी का पैदल सफर अब केवल 30-40 मिनट में सिमटेगा।
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हेमकुंड साहिब परियोजना: भूमि सर्वेक्षण जारी, खराब मौसम के बाद लिडार सर्वे फिर से शुरू।
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लॉजिस्टिक्स: देहरादून से सोनप्रयाग तक निर्माण सामग्री के परिवहन का सफल ड्राई रन।
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कनेक्टिविटी: परियोजनाओं के साथ लास्ट माइल कनेक्टिविटी, पार्किंग और व्यावसायिक गतिविधियों के विकास पर जोर।
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मुख्य सचिव के निर्देश: यूटिलिटी शिफ्टिंग, बिजली और जल आपूर्ति के कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने और हितधारकों से निरंतर संवाद बनाए रखने की हिदायत।
बैठक में मुख्य सचिव ने यह भी रेखांकित किया कि रोपवे के आसपास पार्किंग की उचित व्यवस्था और श्रद्धालुओं के लिए व्यावसायिक सुविधाओं का विकास इस तरह किया जाए कि स्थानीय लोगों को भी रोजगार के अवसर मिल सकें। इन परियोजनाओं को उत्तराखंड में पर्यटन और तीर्थाटन के बुनियादी ढांचे में एक क्रांतिकारी बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।