Uttarakhand: अखंड भारत और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रणेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अर्पित की श्रद्धांजलि

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक और महान शिक्षाविद् श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर उन्हें भावपूर्ण याद किया। सोमवार को मुख्यमंत्री आवास में आयोजित एक गरिमामयी कार्यक्रम में पुष्कर सिंह धामी ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राष्ट्र निर्माण और देश की अखंडता के लिए उनके द्वारा दिए गए बलिदान को याद करते हुए उन्हें एक महान जननायक बताया।

पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी का पूरा जीवन राष्ट्र की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रति समर्पित रहा। वे एक ऐसे महापुरुष थे जिन्होंने स्वतंत्र भारत में ‘एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान’ की व्यवस्था के खिलाफ कड़ा संघर्ष किया। मुख्यमंत्री ने उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि राष्ट्रीय एकीकरण के लिए उन्होंने जो त्याग किया, वह आज भी हर भारतीय के लिए प्रेरणा का एक महान स्रोत है। उनके विचार और नीतियां आज के सशक्त भारत के निर्माण में एक मार्गदर्शक की भूमिका निभा रही हैं।

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और अटूट निष्ठा
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने सदैव देशहित को व्यक्तिगत और राजनीतिक हितों से ऊपर रखा। उनके लिए राष्ट्र की सुरक्षा और स्वाभिमान सर्वोपरि था। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रति उनकी अटूट निष्ठा ने भारतीय राजनीति को एक नई दिशा प्रदान की। मुख्यमंत्री ने उनके बौद्धिक व्यक्तित्व की सराहना करते हुए कहा कि वे न केवल एक कुशल राजनीतिज्ञ थे, बल्कि एक प्रखर शिक्षाविद् भी थे, जिन्होंने समाज के बौद्धिक उत्थान के लिए निरंतर कार्य किया।

पुष्कर सिंह धामी ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी का त्याग और संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को सदैव देशभक्ति का पाठ पढ़ाता रहेगा। उनके द्वारा दिखाए गए सत्य और राष्ट्रसेवा के पथ पर चलकर ही एक वैभवशाली और समृद्ध भारत का सपना साकार किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की जनता की ओर से वे इस महान विभूति को नमन करते हैं, जिनके आदर्श आज भी लाखों युवाओं के दिलों में राष्ट्र के प्रति प्रेम की अलख जगा रहे हैं।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी के व्यक्तित्व और योगदान के मुख्य बिंदु

  • अखंड भारत का संकल्प: उन्होंने भारत की एकता और अखंडता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए ऐतिहासिक संघर्ष किया और अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

  • सांस्कृतिक राष्ट्रवाद: श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने भारतीय संस्कृति और परंपराओं को आधुनिक राष्ट्रवाद का आधार माना और इसे वैश्विक पहचान दिलाने का प्रयास किया।

  • शिक्षा के क्षेत्र में सुधार: एक महान शिक्षाविद् के रूप में उन्होंने भारतीय शिक्षा प्रणाली को भारतीय मूल्यों के अनुरूप ढालने की वकालत की।

  • शिक्षा की दीप्ति: वे बहुत कम आयु में ही कोलकाता विश्वविद्यालय के कुलपति बने, जो उनके असाधारण बौद्धिक कौशल को दर्शाता है।

  • राष्ट्रसेवा का आदर्श: मुख्यमंत्री के अनुसार, उनका जीवन कठिन परिस्थितियों में भी सिद्धांतों पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने डॉ. मुखर्जी के राष्ट्र निर्माण में दिए गए अमूल्य योगदान को याद करते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार उनके सपनों के अनुरूप उत्तराखंड को प्रगति के पथ पर ले जाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री आवास में उपस्थित लोगों ने भी श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्शों को जीवन में उतारने का संकल्प लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे व्यक्तित्व सदियों में एक बार जन्म लेते हैं और उनका कृतित्व युगों-युगों तक राष्ट्र का मार्गदर्शन करता रहता है।

 

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