Himachal: अनुकंपा आधार पर नियुक्ति के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता अनिवार्य और हिमाचल हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने अनुकंपा के आधार पर दी जाने वाली सरकारी नियुक्तियों को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और स्पष्ट कानूनी व्यवस्था दी है। अदालत ने अपने हालिया निर्णय में साफ कर दिया है कि मानवीय आधार पर मिलने वाली इन नौकरियों के लिए भी निर्धारित न्यूनतम शैक्षिक योग्यता का होना अनिवार्य है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चतुर्थ श्रेणी (क्लास-4) के पदों पर नियुक्ति के लिए, चाहे वह नियमित हो या दैनिक वेतन (डेली वेज) के आधार पर, अभ्यर्थी का कम से कम 10वीं पास होना आवश्यक है। इस अनिवार्य योग्यता के बिना अनुकंपा के आधार पर कोई दावा नहीं किया जा सकता।

यह मामला न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल की पीठ के समक्ष आया था। अदालत ने एक याचिका को खारिज करते हुए यह व्यवस्था दी। मामले के तथ्यों के अनुसार, प्रार्थी ने चतुर्थ श्रेणी पद पर अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति की गुहार लगाई थी। हालांकि, शिक्षा विभाग द्वारा पूर्व में जारी किए गए आदेशों में यह बात सामने आई थी कि याचिकाकर्ता की शैक्षिक योग्यता केवल आठवीं कक्षा तक ही सीमित थी। विभाग ने योग्यता की कमी के कारण प्रार्थी के आवेदन को अस्वीकार कर दिया था, जिसे अब हाई कोर्ट ने भी सही ठहराया है।

न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने अपने फैसले में टिप्पणी करते हुए कहा कि जब यह स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता के पास संबंधित पद के लिए आवश्यक न्यूनतम शैक्षिक योग्यता नहीं है, तो विभाग द्वारा उसका दावा खारिज किए जाने पर वह कोई आपत्ति नहीं उठा सकता। अदालत ने माना कि सरकारी सेवाओं में गुणवत्ता और निर्धारित मानकों को बनाए रखने के लिए शैक्षिक मानदंडों का पालन करना आवश्यक है, भले ही नियुक्ति अनुकंपा के आधार पर ही क्यों न दी जा रही हो।

क्या कहती है वर्ष 2019 की अनुकंपा नियुक्ति पॉलिसी

अदालत ने अपने आदेश में वर्ष 2019 में राज्य सरकार द्वारा जारी की गई अनुकंपा नियुक्ति पॉलिसी का भी विस्तार से उल्लेख किया। इस नीति के मुख्य प्रावधान निम्नलिखित हैं:

  • विभागीय नियुक्ति: नीति के अनुसार, अनुकंपा आधार पर नियुक्ति प्राथमिकता के आधार पर उसी विभाग में दी जानी चाहिए, जिसमें मृतक कर्मचारी कार्यरत था या जिससे वह चिकित्सकीय आधार पर सेवानिवृत्त हुआ था।

  • योग्यता और कौशल: नियुक्ति के लिए सबसे पहली शर्त यह है कि अभ्यर्थी के पास उस पद के लिए निर्धारित न्यूनतम शैक्षिक योग्यता होनी चाहिए। इसके अलावा, यदि पद के लिए किसी विशेष कौशल (जैसे टाइपिंग या तकनीकी ज्ञान) की आवश्यकता है, तो उसे भी पूरा करना अनिवार्य होगा।

  • दैनिक वेतनभोगी व्यवस्था: नीति के एक विशेष क्लॉज में यह स्पष्ट किया गया है कि यदि मृतक कर्मचारी स्वयं दैनिक वेतनभोगी के रूप में कार्य कर रहा था, तो उसके आश्रित को मिलने वाली रोजगार सहायता भी दैनिक वेतन के आधार पर ही प्रदान की जाएगी।

अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि चतुर्थ श्रेणी के पदों पर दी जाने वाली नियुक्तियां भी इन नियमों से बंधी हुई हैं। हाई कोर्ट के इस कड़े रुख ने उन सभी भ्रमों को दूर कर दिया है जिनमें यह माना जाता था कि अनुकंपा के आधार पर योग्यता नियमों में बड़ी ढील दी जा सकती है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि मानवीय संवेदनाओं के साथ-साथ प्रशासनिक नियमों और शैक्षिक मानदंडों का संतुलन बनाना अनिवार्य है।

इस निर्णय का दूरगामी प्रभाव उन सभी लंबित मामलों पर पड़ेगा जहां आश्रितों द्वारा कम शैक्षिक योग्यता के बावजूद चतुर्थ श्रेणी पदों के लिए आवेदन किए गए हैं। अब यह साफ हो गया है कि यदि कोई अभ्यर्थी 10वीं पास नहीं है, तो वह दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी के रूप में भी नियुक्ति पाने का हकदार नहीं होगा। प्रशासन और विभागों को अब इन नियुक्तियों के समय योग्यता प्रमाणपत्रों की गहनता से जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। हाई कोर्ट का यह फैसला सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता और नियमों की सर्वोच्चता को पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

 

Pls read:Himachal: लोक निर्माण विभाग अब सड़कों के साथ बांधों का भी करेगा निर्माण

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *