चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से जुड़े हालिया वीडियो विवाद में आम आदमी पार्टी (आप) ने एक नया और चौंकाने वाला दावा किया है। पार्टी ने इस वीडियो को सिरे से खारिज करते हुए इसे सिखों के सर्वोच्च ‘पंथ’ के खिलाफ रची गई एक गहरी और सोची-समझी साजिश करार दिया है। आम आदमी पार्टी का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल किया गया यह वीडियो पूरी तरह से नकली है और इसमें दिखाई देने वाला व्यक्ति मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि उनके जैसा दिखने वाला कोई कलाकार है।
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए विरोधियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कुछ पंथ विरोधी तत्व और एजेंसियां पंजाब की शांति को भंग करने तथा धार्मिक भावनाओं को भड़काने के लिए सुनियोजित तरीके से काम कर रही हैं। चीमा के अनुसार, मुख्यमंत्री की छवि को जनता और पंथ की नजरों में गिराने के लिए इस प्रकार के निम्न स्तर के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। उन्होंने इसे केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की प्रतिष्ठा पर हमला बताया।
वीडियो की प्रामाणिकता को लेकर हरपाल सिंह चीमा ने तकनीकी दावों की झड़ी लगा दी। उन्होंने खुलासा किया कि पंजाब सरकार ने इस विवादित वीडियो की विस्तृत जांच राज्य के बाहर स्थित दो प्रतिष्ठित प्रयोगशालाओं से कराई है। उनके अनुसार, विशेषज्ञों ने 1191 अलग-अलग कोणों (एंगल्स) से इस वीडियो का तकनीकी विश्लेषण किया है। जांच के निष्कर्षों का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि वीडियो में मौजूद व्यक्ति की शारीरिक विशेषताएं मुख्यमंत्री भगवंत मान से मेल नहीं खाती हैं। यह आधुनिक एडिटिंग तकनीक का उपयोग कर तैयार किया गया एक भ्रम है, जिसमें एक एक्टर का सहारा लेकर मुख्यमंत्री की छवि बिगाड़ने की कोशिश की गई है।
वित्त मंत्री ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि धार्मिक आस्थाओं और पंथ के सम्मान के साथ खिलवाड़ करने वाली ताकतों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस गहरी साजिश के पीछे जो भी लोग शामिल हैं, उन्हें कानून के कटघरे में खड़ा किया जाएगा। सरकार उन लोगों की पहचान करने में जुटी है जिन्होंने इस वीडियो को तैयार किया और इसे जानबूझकर वायरल किया। चीमा ने कहा कि अपराधी चाहे देश में हो या विदेश में, मान सरकार उन्हें सजा दिलाकर ही दम लेगी।
प्रेस वार्ता के दौरान मौजूद बलतेज पन्नू ने भी सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि तकनीक का सहारा लेकर झूठ और भ्रम फैलाना समाज के लिए खतरनाक है। सरकार ऐसे सभी डिजिटल फुटप्रिंट्स की जांच कर रही है ताकि अफवाह फैलाने वालों का असली चेहरा सामने आ सके। उन्होंने पंजाब की जनता और सिख संगत से अपील की कि वे ऐसे भ्रामक प्रचारों से प्रभावित न हों और राज्य के भाईचारे तथा शांति को बनाए रखने में सरकार का सहयोग करें।
इस नए खुलासे के बाद पंजाब की राजनीति में एक बार फिर उबाल आ गया है। जहां एक ओर आम आदमी पार्टी इसे तकनीकी आधार पर फर्जी बताकर क्लीन चिट दे रही है, वहीं विपक्षी दल अब भी सरकार के इन दावों पर सवाल उठा रहे हैं। फिलहाल, 29 जून को प्रस्तावित विधायकों की पेशी से पहले पार्टी ने अपना रुख और अधिक आक्रामक कर लिया है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार इन लैब रिपोर्ट्स को सार्वजनिक करेगी और इस मामले में आगे क्या कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
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