तेल अवीव। अमेरिका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक शांति समझौते पर इजरायल ने अपनी पहली और बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है। इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर ने सोमवार को स्पष्ट कर दिया कि डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता में तैयार हुई यह डील इजरायल पर किसी भी तरह से लागू नहीं होगी। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि इजरायल अपने सुरक्षा संबंधी निर्णय लेने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है और वह अंतरराष्ट्रीय समझौतों के आधार पर अपनी रक्षा को खतरे में नहीं डालेगा।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब डोनाल्ड ट्रंप के प्रयासों से अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और युद्ध में अस्थायी संघर्षविराम को लेकर सहमति बनी है। इस समझौते पर औपचारिक मुहर शुक्रवार, 19 जून को स्विट्जरलैंड में लगने वाली है।
स्वतंत्र संप्रभुता का दिया हवाला
शांति समझौते की घोषणा के बाद इतामार बेन-ग्विर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी बात रखते हुए कहा कि इजरायल संयुक्त राज्य अमेरिका के अधीन नहीं है। उन्होंने लिखा कि यद्यपि इजरायल अमेरिका से प्रेम करता है और डोनाल्ड ट्रंप के प्रयासों का आभारी है, लेकिन इजरायल कोई ‘बनाना रिपब्लिक’ यानी कमजोर देश नहीं है। उन्होंने साफ किया कि अंतरराष्ट्रीय समझौते इजरायल के सुरक्षा हितों को बाधित नहीं कर सकते। बेन-ग्विर का मानना है कि ईरान समर्थित हिजबुल्ला और अन्य समूहों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने के लिए इजरायली सेना के हाथ बंधे नहीं होने चाहिए।
इतिहास से दी सीख
अपने विरोध को तर्कसंगत बताते हुए इजरायली मंत्री ने अतीत के समझौतों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जब भी इजरायल ने विदेशी दबाव के आगे समर्पण किया है, उसे भारी नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने ओस्लो समझौते और 2006 के लेबनान समझौते का जिक्र करते हुए कहा कि हर बार अंतरराष्ट्रीय दबाव में आकर सुरक्षा से समझौता करने की कीमत इजरायल ने अपने नागरिकों के खून से चुकाई है। उन्होंने चेतावनी दी कि इजरायल अब ऐसी गलती दोबारा नहीं दोहराएगा।
लेबनान और हिजबुल्ला पर कड़ा रुख
बेन-ग्विर ने लेबनान सीमा पर जारी तनाव के संदर्भ में कहा कि वह ऐसे किसी भी समझौते को स्वीकार नहीं करेंगे जो इजरायली सेना की कार्रवाई को सीमित करता हो। उनकी स्पष्ट मांग है कि हिजबुल्ला के पूर्ण खात्मे से कम कुछ भी स्वीकार्य नहीं होगा। साथ ही उन्होंने युद्ध के दौरान नियंत्रण में ली गई जमीन से पीछे हटने से भी इनकार कर दिया। उन्होंने दो टूक कहा कि अगर उत्तरी इजरायल पर एक भी ड्रोन या मिसाइल आती है, तो उसका जवाब बेरूत के दहिया इलाके पर हमला करके दिया जाएगा।
समझौते की वर्तमान स्थिति
दूसरी ओर, अमेरिका और ईरान के बीच संधि की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। ईरानी उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने भी पुष्टि की है कि समझौता तैयार है। हालांकि, ईरान ने भी स्पष्ट किया है कि जब तक 19 जून को अंतिम दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं हो जाते, तब तक इसे क्रियान्वित नहीं किया जाएगा।
समझौते की मुख्य बातें और इजरायल का विरोध
मध्यस्थता: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते में मुख्य भूमिका निभाई है।
मुख्य बिंदु: होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना और क्षेत्रीय संघर्षविराम।
हस्ताक्षर: 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक दस्तखत की तैयारी।
इजरायल की आपत्ति: इजरायल का कहना है कि यह डील उसकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं करती।
हिजबुल्ला का मुद्दा: इजरायल हिजबुल्ला के खात्मे तक युद्ध जारी रखना चाहता है।
सैन्य आजादी: बेन-ग्विर ने स्पष्ट किया कि इजरायली सेना किसी भी विदेशी दबाव में अपनी कार्रवाई नहीं रोकेगी।
इतामार बेन-ग्विर के इस रुख से स्पष्ट है कि भले ही अमेरिका और ईरान के बीच शांति की राह प्रशस्त होती दिख रही हो, लेकिन इजरायल की असहमति इस क्षेत्र में पूर्ण शांति की स्थापना में एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी। बेन-ग्विर ने साफ कर दिया है कि उनके लिए राष्ट्र की सुरक्षा सर्वोपरि है और इसके लिए वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अकेले खड़े रहने को भी तैयार हैं।
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