देहरादून। नीट (यूजी)-2026 की पुनः परीक्षा में बैठने वाले अभ्यर्थियों के लिए उत्तराखंड सरकार ने एक बड़ा और राहत भरा फैसला लिया है। प्रदेश सरकार ने निर्णय लिया है कि इस महत्वपूर्ण परीक्षा में शामिल होने वाले राज्य के मूल निवासी छात्र उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में बिना किसी शुल्क के यात्रा कर सकेंगे। यह सुविधा अभ्यर्थियों को उनके परीक्षा केंद्रों तक सुगमता से पहुंचाने और उन पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करने के उद्देश्य से प्रदान की जा रही है।
इस योजना का लाभ विशेष रूप से उन अभ्यर्थियों को मिलेगा जो उत्तराखंड के स्थायी निवासी हैं। यात्रा के दौरान छात्रों को अपना नीट (यूजी)-2026 का प्रवेश पत्र (एडमिट कार्ड) दिखाना अनिवार्य होगा। इस प्रवेश पत्र को ही यात्रा के लिए वैध दस्तावेज माना जाएगा, जिसके आधार पर बस परिचालक उन्हें शून्य मूल्य का टिकट जारी करेंगे। सरकार का यह कदम उन हजारों युवाओं के लिए मददगार साबित होगा जो इस राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा के लिए फिर से तैयारी कर रहे हैं।
परिवहन विभाग द्वारा जारी विस्तृत दिशा-निर्देशों के अनुसार, यह निःशुल्क यात्रा सुविधा परीक्षा की तिथि से दो दिन पहले शुरू हो जाएगी और परीक्षा संपन्न होने के दो दिन बाद तक प्रभावी रहेगी। इसका अर्थ यह है कि अभ्यर्थी अपने घर या वर्तमान निवास स्थान से परीक्षा केंद्र तक जाने के लिए परीक्षा से दो दिन पहले बस सेवा का उपयोग कर सकते हैं। इसी प्रकार, परीक्षा समाप्त होने के बाद अगले दो दिनों के भीतर वे वापस अपने गंतव्य तक निःशुल्क लौट सकेंगे। इस अतिरिक्त समय सीमा का प्रावधान इसलिए किया गया है ताकि दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले छात्रों को आने-जाने में कोई हड़बड़ी न हो और वे शांतिपूर्ण ढंग से परीक्षा दे सकें।
प्रशासनिक स्तर पर इस फैसले को लागू करने के लिए परिवहन सचिव बृजेश कुमार सन्त ने उत्तराखंड परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक को आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं। जारी आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि यह सुविधा केवल उत्तराखंड परिवहन निगम द्वारा संचालित साधारण श्रेणी की बसों में ही उपलब्ध होगी। निगम की लग्जरी, एसी या जनरथ जैसी विशेष श्रेणियों की बसों में यह सुविधा मान्य नहीं होगी। इसके अलावा, छात्र केवल अपने परीक्षा केंद्र तक जाने वाले सबसे छोटे और निर्धारित मार्ग पर ही इस छूट का लाभ उठा सकेंगे।
यह निर्णय उन छात्रों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जो पुनः परीक्षा के कारण मानसिक दबाव महसूस कर रहे थे। उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाले छात्रों के लिए, जिनके परीक्षा केंद्र अक्सर मैदानी जिलों या दूसरे शहरों में होते हैं, यह सुविधा अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी। इससे उन्हें परिवहन पर होने वाले खर्च की चिंता से मुक्ति मिलेगी।
परिवहन निगम को निर्देशित किया गया है कि वे सभी बस अड्डों और मार्गों पर तैनात अपने कर्मचारियों को इस संबंध में सूचित करें। सचिव ने स्पष्ट किया है कि प्रवेश पत्र दिखाने पर किसी भी पात्र छात्र को यात्रा से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उत्तराखंड सरकार ने इस पहल के माध्यम से राज्य के युवाओं के शैक्षणिक भविष्य के प्रति अपनी संवेदनशीलता प्रदर्शित की है। अब प्रदेश के अभ्यर्थी अपनी पूरी ऊर्जा परीक्षा की तैयारी पर केंद्रित कर सकेंगे, क्योंकि उनके आने-जाने की व्यवस्था राज्य सरकार द्वारा सुनिश्चित कर दी गई है।