शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला का ऐतिहासिक रिज मैदान सोमवार की शाम को एक बार फिर से सांस्कृतिक रंगों में सराबोर हो गया। राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने दीप प्रज्ज्वलित कर पांच दिनों तक चलने वाले प्रतिष्ठित ‘शिमला अंतरराष्ट्रीय ग्रीष्मोत्सव’ का औपचारिक उद्घाटन किया। शाम के वक्त पहाड़ों की वादियों में संगीत की गूंज और कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने उत्सव के पहले ही दिन दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने इस अवसर पर जनता को संबोधित करते हुए कहा कि शिमला अंतरराष्ट्रीय ग्रीष्मोत्सव केवल एक मेला नहीं है, बल्कि यह हिमाचल प्रदेश की समृद्ध संस्कृति, कला और परंपराओं को संरक्षित करने और उन्हें विश्व स्तर पर बढ़ावा देने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करते हैं। इसके साथ ही, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि यह उत्सव राज्य के पर्यटन क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्यपाल के अनुसार, इस तरह के अंतरराष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम दुनिया भर से पर्यटकों को शिमला की ओर आकर्षित करते हैं, जिससे उन्हें शहर की जीवंत शामों और देवभूमि की अनूठी आतिथ्य सत्कार परंपरा को करीब से देखने और महसूस करने का अवसर मिलता है।
ग्रीष्मोत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष और शिमला के उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कार्यक्रम की शुरुआत में राज्यपाल का औपचारिक स्वागत किया। उन्होंने राज्यपाल को स्मृति चिह्न भेंट कर उन्हें सम्मानित किया और आयोजन की तैयारियों के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी। इस उद्घाटन समारोह के दौरान शिमला के विधायक हरीश जनार्था और नगर निगम शिमला के महापौर सुरिंदर चौहान भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। इन सभी गणमान्य अतिथियों ने रिज मैदान पर उत्सव की रंगत का आनंद लिया और कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
यह उत्सव अगले पांच दिनों तक शिमला के जनजीवन को नई ऊर्जा से भर देगा। ऐतिहासिक रिज मैदान, जो शिमला की पहचान माना जाता है, वहां इस दौरान विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोक नृत्य और संगीत संध्याएं आयोजित की जाएंगी। स्थानीय प्रशासन ने पर्यटकों और निवासियों की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। शहर के मुख्य चौक-चौराहों को सजाया गया है और आने वाले दिनों में कई नामी कलाकारों के मंच पर आने की संभावना है।