देहरादून। उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने मंगलवार को सचिवालय में जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में ‘एग्री स्टैक’ और डिजिटल क्रॉप सर्वे से जुड़े कार्यों की समीक्षा करना और उनमें आ रही बाधाओं को दूर करना था। आनंद बर्द्धन ने स्पष्ट किया कि एग्री स्टैक से संबंधित कार्य उत्तराखंड के किसानों के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और इसमें किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि अंश निर्धारण के कार्यों में विशेष रूप से देहरादून, बागेश्वर, नैनीताल और हरिद्वार जनपदों को अधिक सक्रिय होने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इन जिलों के जिलाधिकारियों को प्रोएक्टिव होकर काम करना होगा ताकि निर्धारित लक्ष्यों को समय पर हासिल किया जा सके। आनंद बर्द्धन ने चेतावनी दी कि यदि एग्री स्टैक से जुड़े कार्य समय पर पूरे नहीं हुए, तो भारत सरकार की कई महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ राज्य के किसानों को मिलना बंद हो सकता है।
किसानों के पंजीकरण को लेकर मुख्य सचिव ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने बताया कि भविष्य में उर्वरकों (फर्टिलाइजर्स) का वितरण केवल उन्हीं किसानों को किया जाएगा जिनका पंजीकरण पोर्टल पर होगा। पंजीकरण कार्य को गति देने के लिए उन्होंने जिलों में विशेष कैंप आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दैनिक आधार पर प्रगति की निगरानी की जाए ताकि कोई भी पात्र किसान पंजीकरण से न छूटे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पंजीकरण कार्य पूर्ण न होने की स्थिति में न केवल उर्वरक वितरण, बल्कि पीएम किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं का लाभ भी अटक सकता है।
बैठक में डिजिटल क्रॉप सर्वे के कार्यों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। राज्य में सर्वेक्षण कर्मियों की कमी को देखते हुए आनंद बर्द्धन ने एक नया मॉडल अपनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इस कार्य में स्वयं सहायता समूहों, युवा मंगल दलों और उच्च शिक्षण संस्थानों के छात्रों की मदद ली जा सकती है। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि इन युवाओं और आपदा मित्रों को आवश्यक तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया जाए, जिससे वे डिजिटल क्रॉप सर्वे के कार्य को कुशलतापूर्वक संपन्न कर सकें। इससे न केवल कार्य में तेजी आएगी, बल्कि युवाओं को भी एक नया अनुभव प्राप्त होगा।
मुख्य सचिव ने किसानों के बीच जागरूकता फैलाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों को यह समझाना जरूरी है कि एग्री स्टैक उनके हित में है और इससे उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में आसानी होगी। बैठक के अंत में उन्होंने सभी जिलाधिकारियों से कहा कि वे इस कार्य को प्राथमिकता के आधार पर लें।
इस समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, सचिव शैलेश बगौली, नितेश कुमार झा, वी. षणमुगम, विशेष सचिव पराग मधुकर धकाते, एस. एन. पाण्डेय और रंजना राजगुरु सहित अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित रहे। मुख्य सचिव ने सभी अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए ताकि राज्य का कृषि विभाग डिजिटल सुधारों की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सके