US: ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता के बीच सैन्य टकराव तेज – The Hill News

US: ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता के बीच सैन्य टकराव तेज

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में शांति बहाली की कोशिशों के बीच अमेरिका और ईरान के संबंध एक बार फिर विस्फोटक मोड़ पर पहुंच गए हैं। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप तेहरान के साथ समझौते की मेज पर होने का दावा कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ उनकी सेना ईरानी सैन्य ठिकानों पर विनाशकारी हमले कर रही है। ताजा सैन्य घटनाक्रम में अमेरिका ने दावा किया है कि उसने इस सप्ताह के अंत में ईरान के महत्वपूर्ण ड्रोन कमांड और रडार केंद्रों को निशाना बनाया है। यह कार्रवाई उस समय हुई है जब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संदेशों का आदान-प्रदान भी जारी है।

अमेरिकी सैन्य प्रशासन ने रविवार को आधिकारिक रूप से जानकारी दी कि उसने ईरान के गोरुक और केशम द्वीप पर स्थित रडार स्टेशनों और ड्रोन नियंत्रण स्थलों पर आत्मरक्षा में हवाई हमले किए हैं। अमेरिका ने इन हमलों को तेहरान की ओर से लगातार की जा रही आक्रामक गतिविधियों का जवाब बताया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी कि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र के ऊपर उड़ान भर रहे एक अमेरिकी MQ-1 ड्रोन को मार गिराया था। इसी उकसावे वाली कार्रवाई के प्रतिशोध में अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरानी हवाई सुरक्षा प्रणालियों, एक ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन और दो घातक हमलावर ड्रोनों को पूरी तरह नष्ट कर दिया। पेंटागन ने स्पष्ट किया है कि इस सैन्य कार्रवाई के दौरान किसी भी अमेरिकी सैनिक को कोई क्षति नहीं पहुंची है।

दूसरी ओर, ईरान ने भी इस अमेरिकी कार्रवाई का जवाब देने में देर नहीं लगाई। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने सोमवार को बयान जारी कर कहा कि उसकी एयरोस्पेस सेना ने उस एयरबेस को निशाना बनाया है, जिसका उपयोग अमेरिका ने सिरिक द्वीप पर हमला करने के लिए किया था। हालांकि, ईरान ने उस विशिष्ट एयरबेस की भौगोलिक स्थिति का खुलासा नहीं किया है। यह सैन्य टकराव पिछले हफ्ते से जारी प्रतिशोधात्मक हमलों की कड़ी का हिस्सा है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य के पास दोनों सेनाएं एक-दूसरे के ड्रोन और सैन्य ठिकानों को निशाना बना चुकी हैं।

इस सैन्य तनाव का असर अब कूटनीतिक मेज पर भी दिखने लगा है। डोनल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ प्रस्तावित शांति समझौते को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है। खबरों के अनुसार, ट्रंप ने समझौते के मसौदे को और अधिक संशोधनों के लिए वापस भेज दिया है। डोनल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद स्पष्ट किया कि उन्हें इस समझौते को अंतिम रूप देने की कोई जल्दबाजी नहीं है। वे चाहते हैं कि समझौते की शर्तें पूरी तरह से अमेरिका के पक्ष में हों और ईरान पर कड़े प्रतिबंधों का प्रावधान बना रहे।

अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने भी इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए तेहरान को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य का कोई भी समझौता अमेरिका की सुरक्षा चिंताओं और शर्तों को पूरा करने में विफल रहता है, तो सैन्य कार्रवाई को और अधिक तीव्रता के साथ फिर से शुरू किया जा सकता है। पीट हेगसेथ के अनुसार, अमेरिकी सेना किसी भी बड़े ऑपरेशन के लिए चौबीसों घंटे तैयार है। वाशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ती यह तल्खी संकेत दे रही है कि कूटनीतिक वार्ताओं और सैन्य हमलों का यह विरोधाभासी दौर आने वाले समय में क्षेत्र की स्थिरता के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें ट्रंप के अगले कदम पर टिकी हैं कि वे शांति का रास्ता चुनते हैं या सैन्य दबाव की नीति को आगे बढ़ाते हैं।

 

Pls read:US: ईरान के साथ शांति समझौते पर नहीं बनी बात और ट्रंप ने कड़ा किया रुख

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *