Pakistan: भारत से सैन्य संघर्ष को आसिम मुनीर ने बताया दो विचारधाराओं की लड़ाई – The Hill News

Pakistan: भारत से सैन्य संघर्ष को आसिम मुनीर ने बताया दो विचारधाराओं की लड़ाई

नई दिल्ली। पिछले वर्ष भारत और पाकिस्तान के बीच हुए चार दिवसीय सैन्य संघर्ष को लेकर पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने एक बड़ा बयान दिया है। मुनीर ने इस टकराव को केवल सीमा का विवाद न मानकर ‘दो विचारधाराओं के बीच की लड़ाई’ करार दिया है। रावलपिंडी स्थित सैन्य मुख्यालय में आयोजित एक विशेष समारोह में मुनीर ने यह बातें कहीं। पाकिस्तान ने पिछले साल 6 से 10 मई के बीच हुए इस संघर्ष को ‘मारका-ए-हक’ का नाम दिया है, जिसकी पहली वर्षगांठ के अवसर पर यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था।

मुनीर ने अपने संबोधन के दौरान दावा किया कि इस संघर्ष में पाकिस्तान की सैन्य रणनीति भारत के मुकाबले कहीं अधिक बेहतर और प्रभावी थी। उन्होंने भारत पर पाकिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया और कहा कि उनकी सेना ने अपनी राष्ट्रीय एकता और सैन्य शक्ति के बल पर इसका जवाब दिया। मुनीर के अनुसार, यह पारंपरिक युद्ध न होकर एक वैचारिक निर्णायक युद्ध था जिसने पाकिस्तान की स्थिति को स्पष्ट किया।

भविष्य की सैन्य चुनौतियों पर चर्चा करते हुए आसिम मुनीर ने कहा कि आने वाले समय में युद्ध का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा और अब ‘मल्टी-डोमेन’ यानी बहु-आयामी युद्धों का दौर होगा। इसके लिए पाकिस्तानी सेना अपनी तकनीक, हार्डवेयर और प्रशिक्षण के स्तर को आधुनिक बना रही है। उन्होंने क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए ‘विश्वसनीय प्रतिरक्षा’ को आवश्यक बताया। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तानी नौसेना के लिए हेंगोर-श्रेणी की पनडुब्बियों, नए रॉकेट बल के गठन और आधुनिक लड़ाकू विमानों की खरीद जैसे आधुनिकीकरण कार्यक्रमों का भी विशेष रूप से उल्लेख किया।

इसी सैन्य चर्चा के बीच पाकिस्तान के भीतर एक नया राजनीतिक विवाद भी खड़ा हो गया है। पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्री अली परवेज मलिक ने हाल ही में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान खुद को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर की टीम का एक ‘साधारण कार्यकर्ता’ बताया। मलिक का यह बयान ऐसे समय में आया जब वे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट का लाभ आम जनता तक पहुंचाने का वादा कर रहे थे।

मलिक के इस बयान ने सोशल मीडिया पर भारी हंगामा खड़ा कर दिया है। आलोचकों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एक कैबिनेट मंत्री द्वारा सेना प्रमुख को अपना नेता स्वीकार करना पाकिस्तान की राजनीति में सेना के सीधे हस्तक्षेप और ‘हाइब्रिड’ शासन व्यवस्था की पुष्टि करता है। इंटरनेट मीडिया पर लोग इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बता रहे हैं। कई लोगों का तर्क है कि एक लोकतांत्रिक देश में मंत्री का दायित्व जनता और संसद के प्रति होता है, न कि सैन्य प्रतिष्ठान को खुश करने के लिए। इस बयान को सैन्य नेतृत्व के आगे समर्पण के रूप में देखा जा रहा है, जिससे पाकिस्तान की लोकतांत्रिक छवि पर फिर से सवाल उठने लगे हैं।

कुल मिलाकर, आसिम मुनीर का सैन्य आधुनिकीकरण पर जोर और ऊर्जा मंत्री का विवादित बयान पाकिस्तान की मौजूदा सत्ता संरचना और उसकी भारत विरोधी मानसिकता को फिर से उजागर करता है। जहां एक ओर सेना प्रमुख भविष्य के युद्धों की तैयारी में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर वहां की राजनीतिक व्यवस्था सैन्य साये में दबी नजर आ रही है। मुनीर के बयानों से स्पष्ट है कि पाकिस्तानी सेना अपनी पिछली नाकामियों को ‘वैचारिक जीत’ बताकर जनता के बीच अपनी साख बचाने की कोशिश कर रही है।

 

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