नई दिल्ली। ईरान के सैन्य कार्यक्रमों को मिलने वाली बाहरी मदद को रोकने के लिए अमेरिका ने एक बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार को अमेरिकी प्रशासन ने चीन और हांगकांग सहित 10 व्यक्तियों और कंपनियों पर कड़े प्रतिबंधों की घोषणा की। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन संस्थाओं पर आरोप लगाया है कि वे ईरान को ‘शाहिद’ ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम के लिए आवश्यक हथियारों के पुर्जे और कच्चा माल खरीदने में सहायता कर रहे थे।
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा इन प्रतिबंधों की घोषणा डोनाल्ड ट्रंप के आगामी चीन दौरे से ठीक पहले की गई है। ट्रंप जल्द ही चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता के लिए बीजिंग पहुंचने वाले हैं। यह कूटनीतिक कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ईरान से जुड़े क्षेत्रीय संघर्ष को सुलझाने के तमाम अंतरराष्ट्रीय प्रयास फिलहाल ठप नजर आ रहे हैं। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने स्पष्ट किया है कि वह ईरान के सैन्य-औद्योगिक नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए हर संभव आर्थिक कार्रवाई करेगा ताकि तेहरान अपनी युद्धक क्षमताओं का विस्तार न कर सके।
प्रतिबंधों की इस सूची में चीन की ‘युशिता शंघाई इंटरनेशनल ट्रेड कंपनी लिमिटेड’ का नाम प्रमुख है, जिस पर ईरान के लिए चीनी हथियार खरीदने का आरोप है। इसके अलावा दुबई की ‘एलीट एनर्जी FZCO’ को भी निशाना बनाया गया है, जिसने हांगकांग की एक कंपनी को लाखों डॉलर स्थानांतरित किए थे। हांगकांग की ‘HK हेसिन इंडस्ट्री कंपनी लिमिटेड’ और बेलारूस की ‘आर्मरी अलायंस LLC’ पर सौदों में बिचौलिए की भूमिका निभाने के आरोप हैं। साथ ही हांगकांग स्थित ‘मस्टैड लिमिटेड’ पर ईरान के ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) के लिए हथियारों की खरीद में मदद करने के कारण प्रतिबंध लगाया गया है।
अमेरिका ने ईरान की ‘पिशगाम इलेक्ट्रॉनिक सफेह कंपनी’ पर ड्रोन मोटर हासिल करने और चीन की ‘हिटेक्स इंसुलेशन निंगबो कंपनी’ पर मिसाइल सामग्री की आपूर्ति का आरोप लगाया है। अमेरिकी विभाग ने चेतावनी दी है कि ईरान के अवैध व्यापार में शामिल किसी भी विदेशी कंपनी या एयरलाइंस के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्त, चीनी तेल रिफाइनरियों से जुड़ी वित्तीय संस्थाओं पर भी ‘सेकेंडरी प्रतिबंध’ लगाने की तैयारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रतिबंधों का मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और ईरान की सैन्य शक्ति को सीमित करना है। उल्लेखनीय है कि फरवरी में अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरानी ठिकानों पर किए गए हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया था। यह संकरा समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस यहीं से गुजरती है। इस मार्ग के बंद होने से वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आया है। एक अनुमान के अनुसार, ईरान के पास हर महीने लगभग 10,000 ड्रोन बनाने की क्षमता है, जो अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि ये प्रतिबंध अब भी सीमित दायरे में हैं क्योंकि अमेरिका ने उन बड़े चीनी बैंकों को अभी तक निशाना नहीं बनाया है जो ईरान की अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं। ऐसे में ईरान को दूसरे वैकल्पिक रास्तों से सैन्य सामग्री खरीदने का मौका मिल सकता है। ट्रंप के चीन दौरे के दौरान इन प्रतिबंधों और ईरान के मुद्दे पर दोनों महाशक्तियों के बीच तीखी बहस होने की संभावना है। अमेरिका ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वह मध्य पूर्व में अस्थिरता पैदा करने वाले किसी भी सैन्य नेटवर्क को बर्दाश्त नहीं करेगा।
Pls read:US: होर्मुज में फिर गहराया तनाव ट्रंप और आरेफ के बयानों से गरमाया माहौल