नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने भारतीय सैन्य नेतृत्व में एक अत्यंत महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए शनिवार को एन एस राजा सुब्रमणि को देश का अगला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) नियुक्त किया है। वह वर्तमान सीडीएस अनिल चौहान का स्थान लेंगे, जिनका कार्यकाल 30 मई को समाप्त होने जा रहा है। रक्षा मंत्रालय द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, कार्यभार संभालने के साथ ही राजा सुब्रमणि सैन्य मामलों के विभाग में भारत सरकार के सचिव की जिम्मेदारी भी संभालेंगे।
राजा सुब्रमणि का चयन उनकी लंबी और विशिष्ट सैन्य सेवाओं को देखते हुए किया गया है। वर्तमान में वह राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार के महत्वपूर्ण पद पर तैनात हैं, जहां वह सितंबर 2025 से कार्यरत हैं। इससे पहले उन्होंने जुलाई 2024 से जुलाई 2025 तक सेना के उप-प्रमुख के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं। लगभग चार दशकों तक फैले उनके सैन्य करियर में उन्होंने रणनीति और संचालन से जुड़े कई चुनौतीपूर्ण पदों पर कार्य किया है।
राजा सुब्रमणि ने अपने सैन्य जीवन की शुरुआत दिसंबर 1985 में गढ़वाल राइफल्स के साथ की थी। वह खड़गवासला स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) और देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) के पूर्व छात्र रहे हैं। अपने शानदार करियर के दौरान उन्होंने लखनऊ स्थित केंद्रीय कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में सेना का नेतृत्व किया। इसके अलावा, उन्होंने उत्तरी कमान के चीफ ऑफ स्टाफ और पश्चिमी मोर्चे पर भारतीय सेना के प्रमुख स्ट्राइक कोर (2 कोर) के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के रूप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। उनके अनुभवों में सैन्य खुफिया विभाग के डिप्टी डायरेक्टर जनरल और कजाकिस्तान में भारत के डिफेंस अटैशे के रूप में कार्य करना भी शामिल है।
ऑपरेशनल मोर्चे पर राजा सुब्रमणि का रिकॉर्ड बेहद प्रभावशाली रहा है। उन्होंने असम में उग्रवाद के खिलाफ चलाए गए ‘ऑपरेशन राइनो’ के दौरान 16 गढ़वाल राइफल्स का सफल नेतृत्व किया। इसके साथ ही उन्होंने जम्मू और कश्मीर में 168 इन्फैंट्री ब्रिगेड और कठिन परिचालन परिस्थितियों वाले सेंट्रल सेक्टर में 17 माउंटेन डिवीजन की कमान भी संभाली। देश के विभिन्न दुर्गम क्षेत्रों और संघर्ष वाले इलाकों में उनकी रणनीतिक सूझबूझ ने उन्हें सेना के शीर्ष अधिकारियों में विशेष पहचान दिलाई है।
राजा सुब्रमणि की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी काफी सुदृढ़ है। उन्होंने वेलिंगटन के डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में चीफ इंस्ट्रक्टर के रूप में कार्य किया है। भारत में प्रशिक्षण प्राप्त करने के अतिरिक्त, उन्होंने ब्रिटेन के ‘ज्वाइंट सर्विसेज कमांड स्टाफ कॉलेज’ और नई दिल्ली स्थित ‘राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज’ से भी उच्च स्तरीय सैन्य शिक्षा प्राप्त की है। वह लंदन के ‘किंग्स कॉलेज’ से मास्टर ऑफ आर्ट्स और मद्रास विश्वविद्यालय से रक्षा अध्ययन में एम.फिल. की डिग्री प्राप्त कर चुके हैं।
उनकी असाधारण और विशिष्ट सेवाओं के लिए सरकार ने उन्हें ‘परम विशिष्ट सेवा पदक’ (पीवीएसएम), ‘अति विशिष्ट सेवा पदक’ (एवीएसएम), ‘सेना पदक’ (एसएम) और ‘विशिष्ट सेवा पदक’ (वीएसएम) जैसे सर्वोच्च सैन्य सम्मानों से नवाजा है। बिपिन रावत और अनिल चौहान के बाद राजा सुब्रमणि देश के तीसरे सीडीएस बनने जा रहे हैं। सीडीएस के रूप में उनके कंधों पर थल सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच तालमेल और एकीकरण को और अधिक मजबूत करने के साथ-साथ सरकार के मुख्य सैन्य सलाहकार की अहम जिम्मेदारी होगी। यह नियुक्ति भारतीय रक्षा प्रणाली को अधिक एकीकृत और सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
Pls read:Delhi: अग्नि 6 मिसाइल के महाशक्तिशाली परीक्षण की आहट और बंगाल की खाड़ी में उड़ानें प्रतिबंधित