Uttarpradesh: यूपी में प्रीपेड मीटर व्यवस्था पर सरकार का यू-टर्न और नई व्यवस्था – The Hill News

Uttarpradesh: यूपी में प्रीपेड मीटर व्यवस्था पर सरकार का यू-टर्न और नई व्यवस्था

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रीपेड स्मार्ट मीटर व्यवस्था को खत्म करने के हालिया फैसले के बाद राज्य में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। विपक्षी दलों ने सरकार के इस कदम को अपने आंदोलन और जनता के भारी विरोध का परिणाम बताया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने इसे जनता की जीत करार देते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का दावा है कि सरकार को अंततः जनहित और चौतरफा दबाव के आगे झुकना पड़ा है।

सरकार का यू-टर्न और नई व्यवस्था

उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के बीच प्रीपेड स्मार्ट मीटर को लेकर उपजे भारी आक्रोश के बाद सरकार ने इस व्यवस्था को समाप्त करने का निर्णय लिया है। अब राज्य में नए बिजली कनेक्शनों के लिए प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। इसके अतिरिक्त, जिन घरों या प्रतिष्ठानों में पहले से ही प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं, उन्हें भी वापस पोस्टपेड व्यवस्था में बदला जाएगा। इस फैसले से उन लाखों उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है जो मीटर की तेज रफ्तार और अप्रत्याशित बिलों से परेशान थे।

अखिलेश यादव की कड़ी प्रतिक्रिया और मांग

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार के इस फैसले पर तंज कसते हुए कहा कि यह विपक्षी दलों और जनता के साझा विरोध की जीत है। उन्होंने सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि जागरूक जनता भाजपा के अत्याचार के आगे अब और नहीं झुकेगी। अखिलेश यादव ने केवल व्यवस्था बदलने तक ही सीमित रहने से इनकार करते हुए मांग की है कि प्रीपेड मीटर के जरिए जनता से जो अतिरिक्त पैसा वसूला गया है, उसे अगले बिलों में तार्किक रूप से समायोजित किया जाए। उन्होंने कहा कि अगर तकनीक का उपयोग मतदाता सूचियों के लिए हो सकता है, तो जनता के पैसे के सही समायोजन के लिए क्यों नहीं। अखिलेश यादव के अनुसार, बिजली बिल के जरिए जनता से लिया गया पैसा भाजपा की लूट का हिस्सा है जिसे वापस करना ही होगा।

संजय सिंह का ‘स्मार्ट चीटर’ वाला तंज

आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रभारी संजय सिंह ने प्रीपेड स्मार्ट मीटरों को ‘स्मार्ट चीटर’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मीटरों के लगने के बाद उपभोक्ताओं का आर्थिक शोषण चरम पर था। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जिन घरों का बिल पहले 1500 रुपये आता था, मीटर बदलने के बाद वह सीधे 6000 से 7000 रुपये तक पहुंचने लगा था। संजय सिंह के अनुसार, आम आदमी पार्टी ने 28 अप्रैल से इस व्यवस्था के खिलाफ मोर्चा खोला था और 3 मई के प्रदेशव्यापी प्रदर्शन के बाद ही सरकार को पीछे हटना पड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उपभोक्ताओं का पूर्ण शोषण बंद नहीं होता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

विरोध प्रदर्शनों का रहा व्यापक असर

पिछले कई महीनों से उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में बिजली के स्मार्ट मीटरों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर और राजनीतिक दलों द्वारा निरंतर विरोध प्रदर्शन किए जा रहे थे। लोगों की मुख्य शिकायत यह थी कि ये मीटर बहुत तेजी से चलते हैं और रिचार्ज खत्म होते ही बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली काट दी जाती है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक प्रमुखता से उठाया था। बढ़ते जन आक्रोश और विपक्षी एकजुटता को देखते हुए सरकार ने इस विवादित व्यवस्था को वापस लेने का फैसला किया है। अब नई व्यवस्था के तहत उपभोक्ताओं को फिर से पुरानी बिलिंग प्रणाली का लाभ मिल सकेगा।

Pls read:Uttarpradesh: कम दर पर टेंडर लेने वाले ठेकेदारों पर लगाम कसेगी उत्तर प्रदेश सरकार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *