शिमला। देहरादून स्थित राष्ट्रीय भारतीय सैन्य कॉलेज (आरआईएमसी) के कैडेट्स के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज शिमला स्थित लोक भवन में राज्यपाल कवींद्र गुप्ता से शिष्टाचार भेंट की। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व नौसेना अधिकारी स्नेहा ने किया, जिनके साथ आरआईएमसी के संकाय सदस्य अरुणा शर्मा और नितिन वैष्णव भी उपस्थित थे। इस मुलाकात के दौरान कैडेट्स ने राज्यपाल के साथ संवाद किया, अपना परिचय दिया और भविष्य में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) में शामिल होकर सशस्त्र बलों, विशेष रूप से भारतीय नौसेना में देश की सेवा करने की अपनी आकांक्षाएं साझा कीं।
राज्यपाल ने कैडेट्स का आत्मीय स्वागत किया और युवाओं को सशस्त्र बलों में सेवा के लिए तैयार करने में आरआईएमसी की अनुकरणीय भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह संस्थान दशकों से देश को अनुशासित, एकाग्र और देशभक्त अधिकारी देने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। राज्यपाल ने कैडेट्स को संबोधित करते हुए अनुशासन, सत्यनिष्ठा और मजबूत चरित्र के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रेरणा देते हुए कहा कि सेना में पद प्राप्त करने से पहले एक मजबूत चरित्र का निर्माण करना अनिवार्य है।
कवींद्र गुप्ता ने कैडेट्स को हर कार्य में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने उनसे मध्यम दर्जे के प्रदर्शन (मिडियोक्रिटी) से बचने और चुनौतियों को विकास के अवसर के रूप में देखने का आह्वान किया। राज्यपाल ने ‘अनेकत्ता में एकता’ के महत्व पर जोर देते हुए प्रसिद्ध पंक्ति ‘अलग भाषा, अलग भेष, फिर भी अपना एक देश’ का उल्लेख किया। उन्होंने कैडेट्स को याद दिलाया कि भारत की असली ताकत इसकी विविधता में निहित है और उन्हें देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर हमेशा गर्व करना चाहिए।
कैडेट्स को जीवन में मानसिक स्पष्टता और आंतरिक शक्ति प्राप्त करने का मंत्र देते हुए राज्यपाल ने उन्हें प्रतिदिन ‘गायत्री मंत्र’ का जाप करने की सलाह दी। नेतृत्व क्षमता पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि एक सच्चा नेता वह होता है जो सामने आकर नेतृत्व करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नेतृत्व सत्ता या अधिकार में नहीं, बल्कि सेवा और उदाहरण पेश करने में निहित है। आधुनिक दुनिया की बदलती मांगों का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने कैडेट्स को जिज्ञासु बने रहने, बौद्धिक रूप से तेज रहने और निरंतर सीखने के प्रति प्रतिबद्ध रहने के लिए प्रेरित किया।
राज्यपाल ने कैडेट्स को याद दिलाया कि वे केवल प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे सैनिक नहीं हैं, बल्कि राष्ट्र के भावी नेता हैं, जिनके कंधों पर देश के मूल्यों को बनाए रखने की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि हमारे सशस्त्र बलों के समर्पण और तत्परता के कारण ही देश सुरक्षित है और कैडेट्स को उस भरोसे के लायक बनना चाहिए। मुलाकात के दौरान कैडेट्स ने लोक भवन का भ्रमण भी किया। ब्रिटिश काल की इस ऐतिहासिक इमारत के दौरे से उन्हें राज्य की प्रशासनिक विरासत और संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को समझने का अवसर मिला।
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