लालकुआं। टांडा रेंज में जंगली हाथी का खौफ कम होने का नाम नहीं ले रहा है।
शुक्रवार को एक बार फिर जंगल में जलावन की लकड़ी लेने गई 76 वर्षीय
बुजुर्ग महिला मैना देवी की हाथी के हमले में दर्दनाक मौत हो गई। पिछले तीन दिनों
के भीतर इस क्षेत्र में हाथी द्वारा जान लेने की यह तीसरी घटना है, जिससे पूरे
इलाके में दहशत का माहौल है। घटना के समय मैना देवी के साथ कुछ अन्य महिलाएं भी
मौजूद थीं, जो इस भयावह दृश्य को देखकर गहरे सदमे में हैं।
प्रत्यक्षदर्शी महिलाओं के अनुसार, वे सभी आपस में बातचीत करते हुए लकड़ी इकट्ठा कर
रही थीं, तभी अचानक टहनियां टूटने की आवाज आई। पीछे मुड़कर देखा तो एक विशालकाय
हाथी सामने खड़ा था, जिसका एक दांत आधा टूटा हुआ था और वह लंगड़ाकर चल रहा
था। जैसे ही मैना देवी ने अन्य महिलाओं को भागने के लिए चिल्लाया, बाकी महिलाएं
झाड़ियों में छिप गईं, लेकिन मैना देवी खुद को बचाने के लिए जंगल की ओर दौड़
पड़ीं। हाथी ने उनका पीछा किया और उनकी उम्र व शारीरिक कमजोरी के कारण वह
ज्यादा दूर नहीं भाग सकीं। हाथी ने उन्हें अपनी सूंड से उठाकर जमीन पर पटक
दिया और फिर पैरों से कुचलकर मार डाला। हाथी की भीषण चिंगाड़ से पूरा जंगल दहल
उठा, जिसे सुनकर साथ गई महिलाएं इतनी डर गईं कि वे पीछे मुड़कर देखने की
हिम्मत भी नहीं जुटा सकीं।
पंतनगर की झा कॉलोनी की निवासी मैना देवी के पति का पहले ही देहांत हो चुका है।
उनके परिवार में एक बेटा और दो बेटियां हैं, जो सभी विवाहित हैं। बताया जा
रहा है कि घर में गैस की किल्लत होने के कारण वह लकड़ी बीनने जंगल गई थीं, ताकि
घर का चूल्हा जला सकें। लेकिन इस दैनिक मजबूरी ने उनकी जान ले ली। इस घटना के
बाद बदहवास होकर अन्य महिलाएं कॉलोनी पहुंचीं और ग्रामीणों को सूचना दी, जिसके
बाद वन विभाग और पुलिस को मामले की जानकारी दी गई।
स्थानीय ग्रामीणों का मानना है कि यह वही हाथी है जिसने दो दिन पहले भी दो अन्य
लोगों पर हमला कर उनकी जान ली थी, क्योंकि दोनों घटनाएं आसपास के क्षेत्रों
में ही हुई हैं। लोगों का कहना है कि लगातार हिंसक होने के बाद यह हाथी अब काफी
आक्रामक हो चुका है। हालांकि, वन विभाग के डीएफओ उमेश चंद्र तिवारी ने
बताया कि इस बात की जांच की जा रही है कि क्या इन सभी घटनाओं के पीछे एक
ही हाथी है या अलग-अलग।
हाथियों के बढ़ते हमलों को देखते हुए वन विभाग ने अब जंगल में गश्त बढ़ा दी है।
डीएफओ उमेश चंद्र तिवारी ने ग्रामीणों से कड़ी अपील की है कि वे किसी भी
स्थिति में लकड़ी लेने के लिए जंगल के भीतर न जाएं। विभाग ने एक महत्वपूर्ण
घोषणा करते हुए कहा कि यदि किसी ग्रामीण को जलावन की लकड़ी की आवश्यकता है, तो
वे सीधे वन विभाग को सूचित करें। उन्हें लकड़ी उनके घर पर ही उपलब्ध कराई जाएगी
ताकि भविष्य में कोई और अपनी जान जोखिम में न डाले। विभाग की टीमें अब इस
लंगड़े और आक्रामक हाथी की निगरानी में जुट गई हैं।