पिथौरागढ़। उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में स्थित पवित्र आदि कैलाश की
यात्रा शुक्रवार, एक मई से आधिकारिक रूप से शुरू हो गई है। धारचूला में
आयोजित एक विशेष और गरिमामय कार्यक्रम के दौरान ‘आदि कैलाश यात्रा 2026’ का
अत्यंत भव्य तरीके से आगाज किया गया। इस पावन यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं
और पर्यटकों के बीच भारी उत्साह और श्रद्धा का माहौल देखा जा रहा है। सीमावर्ती
क्षेत्रों की प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक आस्था के संगम वाली यह यात्रा हिमालयी
पर्यटन के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
यात्रा के पहले जत्थे को उपजिलाधिकारी धारचूला आशीष जोशी ने विधिवत रूप से हरी झंडी
दिखाकर गंतव्य के लिए रवाना किया। इस अवसर पर स्थानीय प्रशासन के अधिकारी और बड़ी
संख्या में क्षेत्रीय नागरिक उपस्थित रहे, जिन्होंने यात्रियों का उत्साहवर्धन
किया। आशीष जोशी ने इस मौके पर यात्रियों की सुरक्षा और सुखद अनुभव को लेकर
प्रशासन की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने बताया कि यात्रा मार्ग पर
बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त किया गया है ताकि श्रद्धालुओं को दुर्गम
रास्तों और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में किसी भी तरह की शारीरिक या मानसिक परेशानी
का सामना न करना पड़े।
पवित्र आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शनों के लिए यात्रियों को इनर लाइन परमिट लेना
अनिवार्य होता है, क्योंकि यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट स्थित है। इस
वर्ष यात्रा के प्रति लोगों में जबरदस्त आकर्षण देखा जा रहा है। आधिकारिक
जानकारी के अनुसार, अब तक इनर लाइन परमिट प्राप्त करने के लिए लगभग 500
आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। प्रशासन ने इनमें से 350 आवेदकों की जांच प्रक्रिया
पूरी कर उन्हें परमिट जारी कर दिए हैं। बाकी बचे आवेदनों पर भी तेजी से काम
किया जा रहा है ताकि आने वाले दिनों में और अधिक यात्री इस यात्रा में शामिल हो
सकें।
आदि कैलाश यात्रा का एक विशेष धार्मिक महत्व यह भी है कि जब यात्रियों का दल
ज्योलिंगकौग पहुंचेगा, उसी समय वहां स्थित भगवान शिव के प्राचीन
मंदिर के कपाट विधिवत रूप से खोले जाएंगे। यह एक पारंपरिक व्यवस्था है
जिसके तहत मंदिर के कपाट यात्रियों के आगमन के साथ ही खुलते हैं। इसके बाद
श्रद्धालु भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना कर सकेंगे।
आदि कैलाश को हिंदू धर्म में विशेष स्थान प्राप्त है और इसे ‘छोटा कैलाश’ भी कहा
जाता है। इसकी संरचना और धार्मिक महत्ता तिब्बत स्थित कैलाश मानसरोवर के समान
ही मानी जाती है। धारचूला से शुरू होकर यह यात्रा हिमालय की दुर्गम चोटियों और
सुंदर घाटियों से होकर गुजरती है। यात्रियों के पहले जत्थे की रवानगी के
साथ ही अब आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या में और भी अधिक बढ़ोतरी होने
की उम्मीद है। प्रशासन ने पूरे यात्रा मार्ग पर स्वास्थ्य शिविर और संचार
व्यवस्थाओं को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।