देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आज ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला, जब
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में हजारों महिलाओं ने ‘महिला आक्रोश
मशाल यात्रा’ निकालकर अपनी आवाज बुलंद की। गांधी पार्क से शुरू होकर घंटाघर
तक चली इस मशाल यात्रा में मातृशक्ति का प्रचंड रूप दिखाई दिया। यह प्रदर्शन
मुख्य रूप से महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) के पारित न हो पाने
के विरोध में किया गया। इस विशाल रैली ने स्पष्ट कर दिया कि उत्तराखंड की महिलाएं
अब अपने अधिकारों के प्रति न केवल सजग हैं, बल्कि किसी भी राजनीतिक षड्यंत्र का
जवाब देने के लिए सड़कों पर उतरने को भी तैयार हैं।
रैली को संबोधित करते हुए पुष्कर सिंह धामी ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने कहा कि यह मशाल यात्रा केवल एक मार्च नहीं है, बल्कि उन ताकतों के
खिलाफ जनाक्रोश की ज्वाला है जो महिलाओं को सशक्त होते नहीं देखना चाहतीं। धामी ने
आरोप लगाया कि विपक्ष की मानसिकता हमेशा से महिला विरोधी रही है। उन्होंने कहा कि
जब भी नारी शक्ति को उनका लोकतांत्रिक हक देने की बात आती है, कुछ राजनीतिक दल
स्वार्थ के चलते उसमें बाधा डालते हैं। मुख्यमंत्री ने चेतावनी देते हुए
कहा कि “अब नारी चुप नहीं रहेगी” और अपने अपमान व अधिकारों के हनन का जवाब
लोकतांत्रिक तरीके से देगी।
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई
परिवर्तनकारी कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि आज की भारतीय नारी केवल दर्शक
नहीं है, बल्कि वह नीति-निर्माण में निर्णायक भूमिका निभा रही है। उन्होंने
संकेत दिया कि परिवारवादी और परंपरागत राजनीति करने वाले दलों को महिलाओं
की बढ़ती भागीदारी रास नहीं आ रही है, इसलिए वे आरक्षण जैसे क्रांतिकारी बदलावों
को रोकने का प्रयास कर रहे हैं। धामी ने विश्वास दिलाया कि राज्य सरकार मातृशक्ति
के सम्मान और सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
मशाल यात्रा के दौरान हजारों की संख्या में माताएं, बहनें और बेटियां हाथों में
मशालें लेकर आगे बढ़ीं, जिससे पूरा मार्ग रोशनी और नारों से गूंज उठा। इस
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के साथ राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट, कैबिनेट
मंत्री रेखा आर्य, विधायक सविता कपूर और आशा नौटियाल सहित कई अन्य महिला
जनप्रतिनिधि व पदाधिकारी मौजूद रहे। प्रदेश के कोने-कोने से आई महिलाओं की भारी
भीड़ ने एक बड़ा राजनीतिक संदेश दिया कि आने वाले समय में वे अपनी एकजुटता से उन
सभी ताकतों को बेनकाब करेंगी जो उनके मार्ग में रोड़ा बन रही हैं। यह आयोजन एक
संकल्प के रूप में समाप्त हुआ, जहाँ नारी शक्ति ने अपने सम्मान और उचित
भागीदारी के लिए निर्णायक भूमिका निभाने की शपथ ली।