चंडीगढ़। आगामी मानसून के दौरान पंजाब को बाढ़ के खतरों से सुरक्षित रखने के लिए
राज्य सरकार ने अपनी तैयारियों को नई गति प्रदान की है। मुख्यमंत्री भगवंत
मान ने सोमवार को एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए राज्य की
बाढ़ प्रबंधन प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने
नदियों और ड्रेनों (नालों) की गहराई से सफाई सुनिश्चित करने के लिए अत्याधुनिक
‘एम्फीबियस’ मशीनों की खरीद को अपनी मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री का स्पष्ट
लक्ष्य है कि समय रहते पुख्ता इंतजाम किए जाएं ताकि किसानों की फसलों और आम
जनता के जानमाल को संभावित नुकसान से बचाया जा सके।
ये विशेष एम्फीबियस मशीनें बहुउद्देश्यीय तकनीक से लैस हैं, जो बहते पानी के भीतर
भी काम करने की क्षमता रखती हैं। इनकी मदद से नदियों और जलाशयों की तली में जमा
गाद (डीसिल्टिंग) को गहराई से निकाला जा सकता है, जो साधारण मशीनों से संभव नहीं
होता। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने फिनलैंड की अपनी यात्रा के दौरान इन
मशीनों की कार्यक्षमता को खुद देखा था और अब इन्हें पंजाब के जल प्रबंधन में
शामिल किया जाएगा। उन्होंने संबंधित विभागों को इन मशीनों की खरीद की
योजना तुरंत तैयार करने का आदेश दिया ताकि सफाई अभियान को अधिक प्रभावी
बनाया जा सके।
बैठक में जल प्रबंधन के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने
भाखड़ा डैम के जलस्तर का विवरण साझा करते हुए बताया कि 26 अप्रैल को यहाँ
जलस्तर 1594 फीट दर्ज किया गया, जबकि इसकी कुल क्षमता 1680 फीट है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि एक जून से शुरू होने वाली धान की
बुआई को ध्यान में रखते हुए नहरों में पानी छोड़ने का सटीक खाका तैयार किया जाए ताकि
किसानों को किसी प्रकार की समस्या न हो।
सरकार ने सिंचाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए 31 मई की समयसीमा तय की है। इस
तारीख तक राज्य भर में पुराने खालों की मरम्मत और सफाई का काम अनिवार्य रूप
से पूरा करना होगा। साथ ही जहाँ आवश्यकता है, वहाँ नए खालों का निर्माण भी किया
जाएगा। मुख्यमंत्री ने ड्रेनों की सफाई की वर्तमान गति पर संतोष व्यक्त करते हुए
कहा कि राज्य के अधिकांश संवेदनशील इलाकों में डीसिल्टिंग का कार्य काफी हद
तक संपन्न हो चुका है, जिससे मानसून के दौरान खतरे को काफी हद तक कम किया जा
सकेगा।
विशेष रूप से रूपनगर जिले पर प्रशासन का अधिक ध्यान है, क्योंकि पिछले वर्ष यहाँ के
लगभग 20 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए थे। भविष्य की सुरक्षा के लिए स्वां नदी के
चैनलाइजेशन की संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है, जिससे न केवल बाढ़ पर
नियंत्रण होगा बल्कि सिंचाई और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। इस समीक्षा बैठक में
कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस, बरिंदर कुमार गोयल, सांसद मलविंदर सिंह कंग और
मुख्य सचिव केएपी सिन्हा समेत कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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