Uttarakhand: भारत के प्रथम गांव माणा पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और लखपति दीदियों की आत्मनिर्भरता को सराहा – The Hill News

Uttarakhand: भारत के प्रथम गांव माणा पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और लखपति दीदियों की आत्मनिर्भरता को सराहा

चमोली। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बुधवार को भारत के प्रथम सीमांत गांव माणा पहुंचे। यहां उन्होंने क्षेत्र का भ्रमण कर स्थानीय निवासियों और चारधाम यात्रा पर आए श्रद्धालुओं से सीधा संवाद किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर चारधाम यात्रा को पूरी तरह सुरक्षित, सुखद और प्लास्टिक मुक्त बनाने का संदेश दिया। उन्होंने श्रद्धालुओं और स्थानीय जनता से अपील की कि वे देवभूमि की पवित्रता बनाए रखने के लिए पर्यावरण संरक्षण में अपना पूर्ण सहयोग दें। माणा गांव पहुंचने पर वहां की महिलाओं ने पारंपरिक मांगलगीत और स्थानीय उत्पाद भेंट कर मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत किया, जिसे देखकर धामी अभिभूत नजर आए।

माणा गांव की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह उत्तराखंड का प्रथम शत-प्रतिशत ‘लखपति दीदी’ गांव बन गया है। मुख्यमंत्री ने गांव की सभी 82 लखपति दीदियों से मुलाकात की और उनके स्वावलंबन के सफर की सराहना की। उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्र की महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पाद न केवल गुणवत्तापूर्ण हैं, बल्कि वे राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन रहे हैं। मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपनी यात्रा के दौरान इन स्थानीय उत्पादों की खरीदारी जरूर करें, जिससे इन मेहनती महिलाओं को सीधा आर्थिक लाभ मिल सके।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले जिन गांवों को “अंतिम गांव” मानकर उपेक्षित रखा जाता था, उन्हें अब “प्रथम गांव” का दर्जा देकर विकास की मुख्यधारा से जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि ‘वाइब्रेंट विलेज’ योजना के तहत सीमांत गांवों में सड़क, बिजली और पानी जैसी आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। माणा गांव आज महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का एक ऐसा वैश्विक मॉडल बनकर उभरा है, जो पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है।

ग्राम पंचायत माणा की सफलता की कहानी स्वयं सहायता समूहों के इर्द-गिर्द बुनी गई है। यहां कुल 12 सक्रिय स्वयं सहायता समूह हैं, जिनसे 82 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। ये महिलाएं ऊनी वस्त्र, हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट, मसाले और दाल जैसे पारंपरिक उत्पादों के साथ-साथ होमस्टे और भोजनालय संचालन जैसे कार्यों में भी संलग्न हैं। इन विविध आर्थिक गतिविधियों के चलते गांव की प्रत्येक महिला की वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक हो गई है। स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए सरस मॉल और विभिन्न स्टॉल भी लगाए गए हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्य सरकार के साझा प्रयासों से सीमांत क्षेत्रों का यह विकास मॉडल आने वाले समय में उत्तराखंड को एक सशक्त और आत्मनिर्भर राज्य बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। माणा गांव की इस प्रगति ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हो और स्थानीय समुदाय का परिश्रम साथ मिले, तो दुर्गम से दुर्गम क्षेत्रों में भी खुशहाली लाई जा सकती है।

 

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