Uttarakhand: भाजपा के नए राष्ट्रीय चेहरा बने पुष्कर सिंह धामी बंगाल चुनाव में स्टार प्रचारक के रूप में छाए

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की छवि वर्तमान में सनातन धर्म के संरक्षक और एक सशक्त प्रशासक के रूप में निखरकर सामने आई है। यही कारण है कि भारतीय जनता पार्टी में वे अब एक प्रमुख ‘पोस्टर बॉय’ के तौर पर उभरे हैं। उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनावों में जीत की हैटट्रिक लगाने की जिम्मेदारी तो उनके कंधों पर है ही, साथ ही अब वे बंगाल जैसे गैर-हिंदी भाषी राज्यों में भी पार्टी के प्रभावशाली स्टार प्रचारक की भूमिका निभा रहे हैं।

पुष्कर सिंह धामी की लोकप्रियता का मुख्य आधार उनके द्वारा लिए गए साहसिक और कड़े निर्णय हैं। उन्होंने राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने, धर्मांतरण के विरुद्ध सख्त कानून बनाने, ‘ऑपरेशन कालनेमि’ संचालित करने और सरकारी भूमि पर धार्मिक प्रतीकों के नाम पर किए गए अवैध अतिक्रमणों को हटाने जैसे कड़े कदम उठाए हैं। इन फैसलों ने उन्हें न केवल हिंदी भाषी राज्यों बल्कि पूरे देश में भाजपा के एक मजबूत चेहरे के रूप में पहचान दिलाई है। दिल्ली, हरियाणा और बिहार के चुनावों में उनकी सक्रियता के बाद अब बंगाल में भी उनके नेतृत्व का असर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता की पहल की गूंज अब अन्य राज्यों में भी सुनाई दे रही है। धामी सरकार ने जिस सहजता और पारदर्शिता के साथ इस कानून को धरातल पर उतारा, उसने अन्य राज्यों के लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाई है। उत्तराखंड के इस सफल प्रयोग को देखते हुए अब गुजरात ने भी इस कानून को क्रियान्वित करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं, जबकि असम जैसे राज्यों में यह एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बन चुका है। बंगाल चुनाव के दौरान बनगांव में आयोजित उनके रोड शो और विभिन्न जनसभाओं में उमड़ी भीड़ उनकी बढ़ती राष्ट्रीय स्वीकार्यता और जनसमर्थन का प्रमाण है।

हाल ही में भाजपा के स्थापना दिवस के अवसर पर प्रदेश कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में पार्टी ने उत्तराखंड में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने यानी जीत की हैटट्रिक का संकल्प लिया। इस संकल्प की नींव धामी सरकार के सुशासन, ठोस नीति नियोजन और विकास कार्यों पर टिकी है। पार्टी के भीतर यह विश्वास बढ़ा है कि पुष्कर सिंह धामी के कठोर लेकिन जनहितैषी निर्णयों और उनकी बेदाग छवि के दम पर आगामी चुनावी चुनौतियों को पार करना आसान होगा। उनके नेतृत्व में उत्तराखंड अब विकास और सनातन परंपराओं के संरक्षण के एक नए मॉडल के रूप में देश के सामने उभर रहा है।

 

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