Uttarakhand: उत्तराखंड में जनगणना 2027 की तैयारी शुरू पोर्टल पर खुद दर्ज कर सकेंगे मकान और परिवार की जानकारी

देहरादून। उत्तराखंड में आगामी जनगणना 2027 को लेकर प्रशासनिक मशीनरी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। राज्य में जनगणना की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है। इस पूरी कवायद के पहले चरण की शुरुआत आगामी 25 अप्रैल से होगी, जो 25 मई तक जारी रहेगी। एक महीने तक चलने वाले इस प्रथम चरण में मुख्य रूप से प्रदेश के समस्त भवनों और मकानों की सूची तैयार करने का महत्वपूर्ण कार्य किया जाएगा।

इस बार की जनगणना प्रक्रिया में डिजिटल तकनीक का व्यापक स्तर पर उपयोग किया जा रहा है। नागरिकों की सुविधा के लिए प्रशासन ने ‘स्वगणना’ (Self-Enumeration) का विकल्प पेश किया है। इसका अर्थ है कि अब लोगों को गणना के लिए सरकारी कर्मचारियों के घर आने का इंतजार करने की आवश्यकता नहीं होगी। नागरिक स्वयं भी अपने मकान और परिवार से संबंधित विवरण वेबसाइट पर अपलोड कर सकेंगे। इस सुविधा के लिए आगामी 10 अप्रैल को एक विशेष पोर्टल का शुभारंभ किया जा रहा है। पोर्टल शुरू होने के बाद लोग ऑनलाइन माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित होगी।

जनगणना के इस चरण में नागरिकों से कुल 33 प्रश्न पूछे जाएंगे। इन सवालों का दायरा काफी विस्तृत है, जिसमें मकान की बनावट से लेकर परिवार की जीवनशैली तक की जानकारी शामिल होगी। इसमें मकान नंबर, जनगणना के लिए आवंटित विशिष्ट संख्या, और मकान के निर्माण में प्रयुक्त सामग्री जैसे फर्श, दीवार और छत किस चीज से बनी है, इसकी जानकारी देनी होगी। इसके अलावा मकान की वर्तमान स्थिति और उसके उपयोग के प्रकार (आवासीय या व्यावसायिक) के बारे में भी पूछा जाएगा।

परिवार से संबंधित खंड में सदस्यों की कुल संख्या, मुखिया का नाम, लिंग और उनकी सामाजिक श्रेणी (जैसे अनुसूचित जाति या जनजाति) का विवरण देना अनिवार्य होगा। आवास में उपलब्ध कमरों की संख्या और विवाहित दंपत्तियों के विवरण भी पूछे जाएंगे। बुनियादी सुविधाओं के तहत पेयजल का मुख्य स्रोत, प्रकाश की व्यवस्था, शौचालय की उपलब्धता और उसके प्रकार, गंदे पानी की निकासी और स्नानगृह की स्थिति जैसे प्रश्न शामिल किए गए हैं।

रसोईघर की सुविधाओं के अंतर्गत एलपीजी या पीएनजी कनेक्शन और खाना पकाने के लिए प्रयुक्त होने वाले ईंधन की जानकारी भी जुटाई जाएगी। इसके अतिरिक्त, परिवार के पास उपलब्ध आधुनिक उपकरणों जैसे रेडियो, टेलीविजन, इंटरनेट, लैपटॉप, कंप्यूटर और स्मार्टफोन का विवरण भी मांगा गया है। परिवहन के साधनों के रूप में साइकिल, मोटरसाइकिल, स्कूटर, कार और जीप की उपलब्धता पर भी सवाल होंगे। अंतिम चरण में परिवार द्वारा उपयोग किए जाने वाले मुख्य अनाज और संपर्क के लिए मोबाइल नंबर की जानकारी दर्ज की जाएगी। इस डेटा का उपयोग राज्य के विकास और भविष्य की योजनाओं के निर्धारण में किया जाएगा।

 

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