Punjab: आम आदमी पार्टी में दरार राज्यसभा में बोलने से रोकने पर राघव चड्ढा ने दी खुली चुनौती

चंडीगढ़। राज्यसभा में उपनेता के पद से हटाए जाने के बाद पंजाब से सांसद राघव चड्ढा ने पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी है। पार्टी नेतृत्व द्वारा उनके खिलाफ की गई कड़ी कार्यवाही के बाद उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया दी है। बीते दिन आम आदमी पार्टी ने न केवल उन्हें उपनेता पद से मुक्त किया, बल्कि राज्यसभा सचिवालय को लिखित निर्देश भी दे दिया कि पार्टी के कोटे से राघव चड्ढा को सदन में बोलने का समय न दिया जाए। इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

आज सुबह अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक वीडियो संदेश जारी करते हुए राघव चड्ढा ने उन लोगों को कड़ा संदेश दिया जिन्होंने उनकी आवाज को दबाने का प्रयास किया है। उन्होंने शायराना अंदाज में चेतावनी देते हुए कहा कि उनकी खामोशी को किसी भी तरह से उनकी हार न समझा जाए। उन्होंने खुद की तुलना एक ऐसे दरिया से की जो समय आने पर सैलाब बनने की क्षमता रखता है। चड्ढा का यह बयान सीधे तौर पर पार्टी के भीतर उनके प्रति बदले हुए व्यवहार की ओर इशारा करता है।

संसद में अपनी सक्रियता का बचाव करते हुए राघव चड्ढा ने सवाल उठाया कि क्या जनता के बुनियादी मुद्दों को उठाना कोई गुनाह है? उन्होंने हैरानी जताई कि आम आदमी पार्टी ने उनके बोलने पर पाबंदी लगाने के लिए राज्यसभा सचिवालय से संपर्क किया। उन्होंने कहा कि वह हमेशा उन विषयों पर बात करते हैं जो आम आदमी के जीवन को सीधे प्रभावित करते हैं लेकिन अक्सर संसद में चर्चा से छूट जाते हैं। चड्ढा ने याद दिलाया कि उन्होंने जोमैटो और ब्लिंकिट जैसे डिलीवरी प्लेटफॉर्म से जुड़े कर्मियों की समस्याओं, बढ़ते टोल टैक्स, बैंकों द्वारा वसूले जाने वाले अनुचित शुल्कों और टेलीकॉम कंपनियों द्वारा रिचार्ज के नाम पर की जा रही लूट जैसे गंभीर मुद्दों को सदन के पटल पर रखा है।

सांसद ने अपनी ही पार्टी के नेतृत्व से तीखा सवाल पूछते हुए कहा कि इन जनहित के मुद्दों को उठाने से देश के नागरिकों का तो फायदा हुआ है, लेकिन इससे आम आदमी पार्टी को क्या नुकसान पहुंचा है? उन्होंने आशंका जताई कि शायद जनता के हक में आवाज उठाना ही उनकी सजा का कारण बना है। उन्होंने अपने समर्थकों और जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें लोगों से असीमित प्यार और आशीर्वाद मिलता रहा है और वे चाहते हैं कि लोग इसी तरह उनका साथ निभाते रहें।

यह पूरा घटनाक्रम आम आदमी पार्टी के भीतर चल रहे आंतरिक कलह को उजागर करता है। राघव चड्ढा को बोलने से रोकने के इस फैसले ने अरविंद केजरीवाल और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ उनके बिगड़ते रिश्तों की चर्चाओं को और बल दे दिया है। फिलहाल राघव चड्ढा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे चुप बैठने वाले नहीं हैं और सही समय आने पर अपना अगला कदम उठाएंगे। चड्ढा के इस रुख से पार्टी के भीतर भविष्य में टकराव और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

 

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