शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून के दौरान नदियों के जलस्तर बढ़ने से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए सरकार ने एक बड़ी योजना तैयार की है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को विधानसभा में घोषणा की कि राज्य की प्रमुख नदियों और खड्डों की ड्रेजिंग (तलछट सफाई) की जाएगी। इसके लिए सरकार ने बाकायदा एक ड्रेजिंग नीति बनाई है और इस महत्वपूर्ण कार्य की जिम्मेदारी वन विकास निगम को सौंपी गई है।
इस अभियान की शुरुआत कुल्लू जिले में ब्यास नदी से एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर की जाएगी। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो दूसरे चरण में मनाली सहित सतलुज और अन्य सहायक नदियों में भी ड्रेजिंग का कार्य शुरू होगा। मुख्यमंत्री ने इसके साथ ही राज्य के ट्रैक्टर मालिकों के लिए भी एक बड़ी राहत की घोषणा की। उन्होंने सदन में कहा कि सरकार एक ऐसी नीति लाएगी जिससे व्यक्तिगत कार्यों के लिए माइनिंग (खनन) करने पर ट्रैक्टरों का चालान नहीं कटेगा। वर्तमान में कृषि उपयोग के लिए पंजीकृत ट्रैक्टरों का छोटे-मोटे निजी कार्यों के लिए उपयोग करने पर पुलिस और माइनिंग विभाग द्वारा भारी जुर्माना लगाया जाता है, जिससे कई परिवारों की आजीविका प्रभावित होती है।
सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सदन को बताया कि अभी माइनिंग करते पकड़े जाने पर ट्रैक्टर का करीब 4,700 रुपये का चालान काटने का प्रावधान है। नई नीति के तहत ट्रैक्टर मालिकों को इन कड़े नियमों में छूट देने का कानूनी तरीका तलाशा जाएगा ताकि उनकी आजीविका पर संकट न आए। ड्रेजिंग के संदर्भ में विस्तृत जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश भर में कुल 42 संवेदनशील स्थान चिह्नित किए गए हैं। मनाली में ब्यास नदी की ड्रेजिंग को प्राथमिकता दी जाएगी, हालांकि इसके लिए वन संरक्षण अधिनियम (एफसीए) के तहत केंद्र से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। कांगड़ा जिले की चक्की खड्ड को भी ड्रेजिंग योजना में शामिल किया गया है।
यह घोषणा विधायक भुवनेश्वर गौड़ के स्थान पर विधायक चंद्रशेखर द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में की गई। इस चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, केवल सिंह पठानिया और रणवीर सिंह निक्का ने भी अनुपूरक प्रश्न पूछे और अपने सुझाव दिए। मंत्रिमंडल ने पहले ही वन विकास निगम को वन क्षेत्रों में ड्रेजिंग कार्य करने के लिए अधिकृत कर दिया है। सरकार का मानना है कि ड्रेजिंग से नदियों की गहराई बढ़ेगी और बरसात के मौसम में बाढ़ का खतरा काफी कम हो जाएगा, जिससे किनारे बसे गांवों और शहरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।
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