US: कोरोना का नया सिकाडा वेरिएंट बढ़ा रहा दुनिया की चिंता

नई दिल्ली। दुनिया एक बार फिर कोरोना के नए खतरे का सामना कर रही है। ओमिक्रॉन का एक नया सब-वेरिएंट ‘बीए.3.2’ (BA.3.2) तेजी से फैल रहा है, जिसे वैज्ञानिकों ने ‘सिकाडा’ नाम दिया है। अब तक यह स्ट्रेन दुनिया के कम से कम 23 देशों में अपनी दस्तक दे चुका है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह वेरिएंट बेहद शांति से पूरी दुनिया में प्रसारित हो रहा है। इसमें म्यूटेशन की संख्या इतनी अधिक और असामान्य है कि यह शरीर की मौजूदा रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को भी आसानी से चकमा देने में सक्षम है।

सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) की रिपोर्ट के मुताबिक, सिकाडा स्ट्रेन की पहचान सबसे पहले नवंबर 2024 में दक्षिण अफ्रीका में हुई थी। इस वेरिएंट का नाम एक शोर मचाने वाले कीड़े ‘सिकाडा’ के नाम पर रखा गया है। इसके पीछे का तर्क यह है कि जिस प्रकार सिकाडा कीड़ा सालों तक जमीन के अंदर छिपा रहता है और अचानक भारी संख्या में बाहर आता है, ठीक उसी तरह यह वेरिएंट भी लंबे समय तक वैज्ञानिकों की नजरों से बचकर अब अचानक कई देशों में फैल गया है।

सिकाडा वेरिएंट की सबसे बड़ी चिंता इसके जेनेटिक बदलावों को लेकर है। इसके स्पाइक प्रोटीन में लगभग 70 से 75 म्यूटेशन पाए गए हैं। तुलनात्मक रूप से देखें तो पिछले सक्रिय वेरिएंट जैसे जेएन.1 और एलपी.8.1 में केवल 30-40 म्यूटेशन ही थे। स्पाइक प्रोटीन वायरस का वह हिस्सा होता है जिससे यह मानव कोशिकाओं में प्रवेश करता है। नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ ब्रैंडन डियोन का कहना है कि म्यूटेशन की इतनी बड़ी संख्या के कारण यह आशंका है कि मौजूदा वैक्सीन इस नए वेरिएंट पर बहुत अधिक प्रभावशाली साबित नहीं होंगी।

लक्षणों की बात करें तो सिकाडा वेरिएंट के लक्षण पिछले कोरोना संक्रमणों जैसे ही नजर आते हैं। संक्रमित व्यक्तियों में गले में खराश, खांसी, नाक बंद होना, थकान, सिरदर्द और बुखार जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं। कुछ मरीजों में पेट से जुड़ी समस्याएं जैसे जी मिचलाना या दस्त की शिकायत भी मिली है। सीडीसी के अनुसार, अमेरिका के 25 राज्यों में इसके मामले पाए गए हैं और हवाई अड्डों पर अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के नमूनों में भी इसकी पुष्टि हुई है।

हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि फिलहाल इस बात के कोई ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं कि सिकाडा स्ट्रेन अधिक गंभीर बीमारी या उच्च मृत्यु दर का कारण बन रहा है। फिर भी, इसकी फैलने की गति और इम्युनिटी को भेदने की क्षमता को देखते हुए वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य प्रणालियों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। वैज्ञानिक लगातार इस वेरिएंट की निगरानी कर रहे हैं ताकि इसके भविष्य के प्रभाव का सटीक आकलन किया जा सके।

 

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