नई दिल्ली। पश्चिमी एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार फिर कड़ा रुख अपना लिया है। एक तरफ जहां ट्रंप तेहरान के साथ कूटनीतिक बातचीत के दावे कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उन्होंने ईरान के महत्वपूर्ण ऊर्जा और तेल ठिकानों को पूरी तरह नष्ट करने की खुली धमकी दी है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि ईरान ने वैश्विक व्यापार के लिए सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (होर्मुज स्ट्रेट) को तुरंत नहीं खोला, तो अमेरिका उसके बिजली संयंत्रों और तेल के कुओं पर बड़ा हमला कर उन्हें मलबे में तब्दील कर देगा।
डोनल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि अमेरिका फिलहाल ईरान में जारी सैन्य अभियानों को समाप्त करने के लिए वहां के एक नए और अधिक समझदार शासन के साथ गंभीर वार्ता कर रहा है। उन्होंने बताया कि इस दिशा में काफी प्रगति भी हुई है, लेकिन उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में यह भी जोड़ा कि यदि किसी कारणवश जल्द ही कोई ठोस समझौता नहीं होता है और होर्मुज का रास्ता व्यापार के लिए बहाल नहीं किया जाता, तो अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई को और अधिक घातक बना देगा। ट्रंप ने सीधे तौर पर ईरान के बिजली उत्पादन संयंत्रों, तेल के कुओं और खर्ग द्वीप को उड़ाने की बात कही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस संभावित हमले को उन अमेरिकी सैनिकों और नागरिकों की हत्या का बदला बताया है, जिन्होंने पिछले 47 वर्षों के दौरान ईरान के पुराने शासन के आतंक के राज में अपनी जान गंवाई है। गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच यह युद्ध अब 31वें दिन में प्रवेश कर चुका है और दोनों पक्षों में से कोई भी झुकने को तैयार नहीं दिख रहा है।
ट्रंप की इस आक्रामक धमकी के जवाब में ईरान ने भी कड़ा पलटवार किया है। ईरान की संयुक्त सैन्य कमान के प्रवक्ता इब्राहिम ज़ुल्फिकारी ने कहा है कि अब अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों के निजी आवासों को भी वैध सैन्य निशाना माना जा सकता है। उन्होंने संकेत दिया है कि यदि अमेरिका ने अपनी धमकियों को अमल में लाया, तो ईरान भी सीधे उच्चाधिकारियों के घरों को निशाना बनाने से पीछे नहीं हटेगा।
परमाणु हथियारों के मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करते हुए ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने कहा कि ईरान का इस्लामी गणराज्य कभी भी परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं कर रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि ईरान अब परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) का हिस्सा बने रहने के अपने पूर्व के फैसले पर पुनर्विचार कर रहा है। फिलहाल, दोनों देशों के बीच बढ़ती यह जुबानी जंग किसी बड़े वैश्विक संकट की ओर इशारा कर रही है।
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